खुद को चूजी नहीं कहूंगा  : अमोल पाराशर

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Amol Parashar as MC Money in Discovery JEET's upcoming show Gabru.

अमोल पाराशर ने आईआईटी में पढ़ाई की, सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी की और फिर एक्टिंग में आ गए। कॉलेज के दिनों में बहुत से नाटकों में काम किया। उन्होंने रॉकेट सिंह और ट्रैफिक जैसी फिल्मों में सकारात्मक भूमिकाएं भी निभाईं। अब डिस्कवरी जीत के शो गबरू के लिए काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस शो में काम करते हुए काफी गहरा अनुभव हुआ। हमने उनसे उनके शो के किरदार और उनकी यहां तक की यात्रा के बारे में जाना। पेश है बातचीत के कुछ अंश :-

आपको एक्टिंग में आने के लिए किस बात ने प्रेरित किया?

मैं एक कंसल्टिंग कंपनी में जॉब करता था, जो दरअसल सॉफ्टवेयर कंपनी नहीं थी। मैं कॉलेज के दिनों में थिएटर किया करता था। मजेदार बात यह है कि मैं आईआईटी में रहते हुए ही थिएटर से जुड़ गया था। यह काफी अजीब था क्योंकि आईआईटी तो आर्ट्स के लिए नहीं जाना जाता है। वहां पर क्लब थे और कई तरह की गतिविधियां थीं। ऐसे में मैंने कॉलेज के दौरान ड्रामाटिक्स को चुना और मुझे यह वाकई बहुत पसंद आया। मैंने कॉलेज में बहुत से नाटकों में काम किया और इसने मुझे बेहद उत्साहित किया। फिर जब मैंने काम करना शुरू किया तो मैं स्टेज और एक्टिंग को मिस करने लगा। मेरे लिए एक्टिंग करने से ज्यादा जरूरी यह था कि मैं ब्रेक लेकर कुछ समय के लिए थिएटर करूं। मैं एक साल तक काम कर चुका था और इस दौरान मैंने एक भी नाटक में काम नहीं किया था, इसलिए मेरे अंदर थिएटर में वापस लौटने की बहुत इच्छा थी। मैं नहीं जानता था कि मेरा यह ब्रेक कितना लंबा होगा। फिर मैंने महसूस किया कि यदि मैं थिएटर करना चाहता हूं तो मैं ऑफिस में काम करते हुए इसे नहीं कर सकता क्योंकि ऑफिस में कभी-कभी ऐसे दिन भी आते थे, जब काम का कोई निर्धारित समय नहीं होता था। यह 9 से 5 वाली नौकरी नहीं थी बल्कि इसमें 9 बजे से लेकर जब चाहे तब काम की जरूरत पड़ती थी। ऐसे में आप को खुद पता नहीं होता था कि आप कब फ्री होंगे। कोई शेड्यूल नहीं होता था। इसी बात से मेरे दिमाग में ब्रेक लेने का आइडिया आया। मैंने अपने कुछ दोस्तों से बात की और उस पर बहुत सोचा। मैं जानता था कि यह आसान नहीं होगा लेकिन फिर मैंने सोचा कि क्यों ना ब्रेक लेकर कुछ अलग किया जाए। यह आज से 5 साल पहले की बात है। मैंने महसूस किया कि अपने पेशेवर जीवन में आप जैसे-जैसे सेटल होने लगते हैं, वैसे-वैसे यह काम मुश्किल होता जाएगा। मैंने सोचा कि फिलहाल तो इसे करते हैं और शायद मैं दोबारा लौट आऊंगा। तो मेरे लिए यह एक छोटे से ब्रेक की बात थी, लेकिन अब मुझे इसमें मजा आ रहा है और यह वाकई एक पेशे की तरह है। मैं इस पेशे के साथ अपना गुजारा भी कर सकता हूं। मैं अब मुंबई में एक एक्टर के तौर पर रहता हूं और लोग भी मुझे एक एक्टर के तौर पर ही जानते हैं। तो इस तरह यह सारा सफर शुरू हुआ।

जब आप डिस्कवरी जीत के शो गबरू के लिए काम कर रहे हैं तो आप कैसा महसूस करते हैं?

यह बेहद दिलचस्प किरदार है। यही वजह है कि मैंने इस शो के लिए सहमति दी। यह एक लंबा कमिटमेंट है क्योंकि इस किरदार के लिए मैंने सबसे ज्यादा दिनों तक शूटिंग की जो इससे पहले किसी भी प्रोजेक्ट के लिए नहीं की। इसलिए इस शो में काम करते हुए मुझे काफी गहरा अनुभव हुआ। यह एक भावुक कहानी है और यह किरदार भी बड़ा पेचीदा है। यदि आपने रॉकेट सिंह या ट्रैफिक देखी होगी तो आप समझ पाएंगे कि मैंने अब तक जो भी काम किए हैं, उसमें मैं एक अच्छा व्यक्ति बना हूं जो हमेशा अच्छे काम करता है। लेकिन मुझे लगता है इस किरदार में बहुत से ग्रे शेड्स हैं। दरअसल शुरुआत में वह एक अच्छा लड़का होता है। वह हिप-हॉप पसंद करता है और वही काम करना चाहता है। यहां तक तो यह किरदार मेरे पिछले किरदारों के समान है लेकिन फिर उसके आसपास के लोग उसके इस चुनाव को अजीब मानते हैं। शो में उसके मां-बाप भी इस विचार से सहमत नहीं होते। इसलिए मुझे हिप-हॉप म्यूजीशियन बनने के लिए अपने मां-बाप को मनाना पड़ता है। फिर वह आगे चलकर देश के सबसे बड़े संगीत स्टार्स में शुमार होता है। इसके बाद वह एक अच्छे लड़के से एक ऐसा व्यक्ति बन जाता है जो अपनी सफलता और शौहरत को पचा नहीं पाता और इसी कारण उसका पतन हो जाता है। इस मामले में मेरे किरदार में बहुत से ग्रे शेड्स हैं, जिससे मुझे पर्दे पर एक एक्टर के रूप में बहुत कुछ करने का मौका मिला। इसलिए मैंने इस शो में बैड बॉय बनकर बहुत मस्ती की।

अपने किरदार गबरू के बारे में कुछ बताएं?

इस किरदार का नाम गौरव सिंह है। जब वह रैपर बन जाता है तो वह अपना नाम बदलकर मैक मनी रख लेता है। उसके लिए मनी बहुत जरूरी चीज है क्योंकि उसे अपने कुछ व्यक्तिगत मामले भी सुलझाने होते हैं। दरअसल, इस शो में एक दृश्य है जहां सभी इस रैपर का नाम सोचते हैं और फिर म्यूजिक लेबल यह नाम सुझाता है। उस वक्त अपने सपनों का पीछा करते हुए उसका अपने परिवार और दोस्तों से नाता टूट चुका होता है। इस स्थिति में उसके दिमाग में आता है कि पैसा सबसे जरूरी चीज है क्योंकि उस समय उसके पास कुछ भी नहीं होता। इसलिए वह इसी बात पर अड़ जाता है और वह अपना नाम भी मनी के नाम पर रख लेता है। यह किरदार उसी विचारधारा पर चलता है और जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यही बात उसके पतन का कारण बनती है क्योंकि आप ज्यादा समय तक ऐसी फिलॉसफी पर टिके नहीं रह सकते।

आप अपने काम को लेकर बेहद चुनिंदा हैं क्योंकि आपने अपनी फिल्में भी बड़ी सावधानीपूर्वक चुनी हैं?

आपकी तरह मेरे बहुत से दोस्त और परिचित भी मेरे लिए यही कहते हैं, लेकिन मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया। मुझे लगता है कि एक एक्टर के तौर पर मेरे लिए यह सहज है कि मैं ऐसी कहानियों से जुड़ूं जिसमें मुझे मजा आए। यदि कोई मेरे पास आता है और अपनी कहानी सुनाता है और यदि मुझे उसकी कहानी सुनने में मजा आता है तो फिर मुझे यह काम करने की इच्छा होती है। यह बड़ा बेसिक पैमाना है। मैं नहीं जानता कि ऐसा करने से आप चूजी हो जाते हैं। दरअसल, यह कम काम करने का फैसला नहीं बल्कि यह वह काम करने का फैसला है जिन्हें करते हुए आपको मजा आए। इसलिए मैं खुद को चूजी नहीं कहूंगा। यदि यह चूजी है तो मैं उन कहानियों को चुनता हूं जिन्हें मैं एंजॉय करता हूं और सोचता हूं कि मैं इन्हें देखना चाहूंगा। जब आप एक एक्टर के तौर पर किसी से जुड़ना चाहते हैं तो उसमें आपको अपनी भावनाएं लानी पड़ेगी और उसका मजा भी लेना पड़ेगा।

डिस्कवरी जीत के शो ‘गबरू’ के अलावा आप कोई और प्रोजेक्ट भी कर रहे हैं?

मैंने एक फिल्म की शूटिंग की है और इसकी कुछ शूटिंग बाकी हैं। एक फिल्म है जिसका नाम है ‘आपके कमरे में कोई रहता है’। इस फिल्म का आइडिया भी बड़ा अनोखा है। यह फिल्म युवा लोगों के बारे में है और उनकी भावनाएं यूनिवर्सल हैं। यह 3-4 युवा किरदारों की कहानी है, जिनके रिश्तों को लेकर अलग-अलग विचार हैं। यह फिल्म इस साल आ सकती है। मुझे लगता है यह फिल्म मई या जून में आएगी।

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