डर मेरी सबसे बड़ी ताकत : मुकेश ऋषि

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Mukesh Rishi as Kalhari in Sony Television's Prithvi Vallabh

पृथ्वी वल्लभजैसे ऐतिहासिक शो का हिस्सा बनकर कैसा लगता है? आप इससे पहले कई पौराणिक शोज़ का हिस्सा बने हैं। क्या यह आपका पहला ऐतिहासिक शो है?

असल में नहीं, मैं टीपू सुल्तान और रानी पद्मिनी किया था, जिसमें मैंने अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका निभाई थी। जब मैंने पृथ्वी वल्लभ की कहानी सुनी, तो मुझे लगा कि इसमें कुछ अलग करने की गुंजाइश है। मैं इस शो का हिस्सा बनकर खुश हूं और मैं टेलीविजन पर ऐसा ट्रेंड देख रहा हूं जिसमें बड़े बजट के शोज़ का निर्माण किया जा रहा है। यह एक स्वागतयोग्य बदलाव है, और पिछले काफी समय से, बनाई जा रही सामग्री और भूमिकाओं के प्रकार समान रहे हैं। इस शो को जिस स्तर पर बनाया जा रहा है, वह काफी प्रभावी है और यह टेलीविजन उद्योग में नए मापदंड स्थापित करेगा।

इस शो में अपने किरदार कल्लारी के बारे में बताएं। इस भूमिका को आत्मसात करने के लिए आपने खुद को किस तरह से तैयार किया?

सच कहूं, मुझे एक लाभ था क्योंकि मैंने पहले भी पौराणिक और ऐतिहासिक शोज़ किए थे। असल में, चूंकि मैंने पहले अलाउद्दीन खिलजी का किरदार निभाया था, इसलिए उसका अनुभव इस भूमिका के लिए मेरे काफी काम आया। शूटिंग के पहले दिन, मैं खराब स्थिति में था, पूरे कपड़े और पगड़ी इतनी भारी थी और इतना ज्यादा ध्यान खींच रही थी कि, मैं डॉयलाग्स याद नहीं रख पा रहा था। मुझे अपने किरदार में लीन होने में कुछ समय लग गया और अंतत: मैं इसमें फिट हो गया। यह रूप और अहसास मेरे लिए पूरी तरह से नया था, मैं उस काल के लोगों की जिंदगी और स्टाइल का अच्छी तरह से आदी नहीं था। लेकिन फिर मैंने आखिरकार इस किरदार को अपना लिया क्योंकि अनुभव काम आया।

यह प्रोजेक्ट आपके पास कैसे आया? आपने इस भूमिका का चुनाव क्यों किया?

सच कहूं, तो मैंने पूरी स्क्रिप्ट नहीं पढ़ी थी। मैंने संक्षेप में इसकी चर्चा की थी और तुरंत ही यह भूमिका करने के लिए तैयार हो गया था। मुख्य रूप से, ऐसा इसलिए था क्योंकि इस उद्योग में मेरे अनुभव से मुझे लगा कि यह एक दिलचस्प प्रोजेक्ट है और मुझे इसे जरूर लेना चाहिए। मुझे समझ आ गया था कि कल्लारी का किरदार एक प्रमुख किरदार है और फिर मैंने बहुत ज्यादा चर्चा नहीं की। बल्कि, इस किरदार ने वैसा ही आकार लिया जैसा मैंने सोचा था, जो कि काफी दिलचस्प है।

आपने काफी सारे नकारात्मक किरदार निभाए हैं, क्या यह ​भूमिका भी वैसी ही होने वाली है या फिर कुछ अलग?

कल्लारी की भूमिका पूरी तरह से अलग है। पहले समस्या यह थी कि जब आप एक नकारात्मक किरदार निभाते थे तो उसमें टाइपकास्ट हो जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। कल्लारी के किरदार में कई पहलू हैं, जो इसे काफी दिलचस्प बनाते हैं। टेलीविजन में, आजकल एक किरदार निर्माण करने के लिए काफी रिसर्च की जाती है, जो काफी प्रगतिशील दृष्टिकोण है। हम टेलीविजन विभिन्न सामग्रियां और उच्च प्रोडक्शन वैल्यू देख रहे हैं। यह एक अच्छा और प्रगतिशील संकेत है। निर्माताओं ने इस शो को इतने बड़े स्तर पर बनाने में बहुत मेहनत की है, जो प्रशंसनीय है।

हमें कल्लारी और पृथ्वी वल्लभ के बीच के संबंध के बारे में संक्षेप में बताएं।

वह पुराने राजा सिंहदंत के समकालीन है। उसने अपनी बेहतरीन रणनीतिक योजना से राज्य की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। वह पृथ्वी वल्लभ के लिए पिता समान और विश्वासपात्र है।

इस किरदार को बहुत अच्छी तरह से रचा गया है। कल्लारी का मालवा राजा के साथ—साथ पृथ्वी और उसके भाई दोनों के साथ खास संबंध है। लेकिन कल्लारी पृथ्वी से काफी निकट है और उनका रिश्ता बहुत मजबूत है। वह पृथ्वी के लिए पिता की तरह है। कल्लारी स्पष्ट रूप से जानता है कि कहां सीमा निर्धारित करनी है, जब जरूरत होती है तो वह पृथ्वी के साथ राजा के समान बर्ताव करता है, समय आने पर उसे सही करने और सही मार्ग दिखाने के लिए उसका गुरु बन जाता है। पृथ्वी भी कई मामलों में उसका सुझाव लेता है। उनका संबंध अनोखा और खास है। यह एक बहुपक्षीय किरदार है और इसके कई पहलू हैं, जो इस किरदार को काफी अनोखा बना देते हैं। संक्षेप में कहें तो, कल्लारी पृथ्वी के लिए एक दोस्त, दार्शनिक और मार्गदर्शक है।

आपने कई बॉलीवुड और टेलीविजन प्रोजेक्ट्स पर काम किया है, क्या ऐसी कोई निश्चित भूमिका है, जिसे आप हमेशा ही निभाना चाहते थे?

पिछले कुछ सालों में, बनाई गईं ज्यादातर भूमिकाएं एक संपूर्ण भूमिका नहीं रही हैं। असल में, यह एक नया ट्रेंड है। ऐसा कहना सही नहीं होगा कि मैंने इन सभी सालों में जितनी भी भूमिकाएं निभाई हैं, वे संपूर्ण भूमिकाएं थी। मुझे अब भी लगता है कि अभी बहुत कुछ करना और पाना है। मैं अब भी उस एक भूमिका का इंतजार कर रहा हूं जो यादगार हो। लेकिन समझौते की बात करें, तो मैं यह मानता हूं कि मुझे इतनी सारी भूमिकाएं और किरदार​ निभाने और एक एक्टर के रूप में आगे बढ़ने का बेहतरीन मौका मिला। मेरे ख्याल से अब मैंने खुद का मौका बना लिया है। मुझे अब भी बहुत दूर जाना है और काफी काम करना है। एक कलाकार के रूप में, मुझे यह महसूस होता है कि हमें ऐसी भूमिकाओं की जरूरत है जो हर तरह से पूर्ण हो और हम जैसे कलाकारों को अपनी क्षमता और अभिनय कौशल प्रदर्शित करने का मौका दे। लेकिन ये भूमिका सीमित और बहुत कम हैं। लेकिन अब हम बदलाव देख रहे हैं और ऐसे ज्यादा किरदारों व भूमिकाओं का निर्माण किया जा रहा है, जो कि एक स्वागत योग्य पहल है।

आप में भाषाओं को लेकर एक योग्यता है और अपने करियर में आप ने कई बहुभाषीय मूवी प्रोजेक्ट्स में काम किया है। आप कितनी भाषाएं बोल सकते हैं और अब तक आपका सफर कैसा रहा है?

जब मैंने दक्षिण भारत में प्रोजेक्ट्स लेना शुरू किया था, तो एक बार में ही मेरे पास साउथ से बहुत सारे अवसर आना शुरू हो गए। मैं तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़ की फिल्मों में लगातार काम कर रहा था और मेरा विश्वास कीजिए, यह शुरुआत में काफी कठिन था। हालांकि, मैंने भाषा पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया था और प्रोत्साहकों की मदद लेनी भी शुरू कर दी थी। प्रोत्साहकों की अच्छी बात यह है कि कहे गए शब्द आपके दिमाग में कुछ समय तक रहते हैं और सही उच्चारण करने में आपकी मदद करते हैं। सीखने में समय लगा और फिर मैं सहूलियत के स्तर पर पहुंच गया और अब मैं इस स्तर पर पहुंच गया हूं जिसमें मैं प्रोत्साहक की थोड़ी मदद से किसी भी समय कोई भी भाषा बोल सकता हूं और मैं 60-70% लिप—सिंक कर सकता हूं। यह नई बात थी जो मुझे सीखने को मिली और हम भाग्यशाली हैं कि हम पर एक किरदार निभाने के लिए भाषा बोलने या जानने की कला में अभ्यस्त होने का दबाव नहीं है। मैं भाग्यशाली महसूस करता हूं कि मुझे अलग—अलग भाषाओं में कई नए शब्द सीखने का मौका मिला है। आखिरकार, हर एक्टर भाषा की बाधा को पार करने के लिए अपना खुद का रास्ता खोजता है। आज, जब मैं अलग—अलग भाषाएं बोलने वाले लोगों के साथ बैठता हूं, तो मुझे लगता है कि मैंने ये शब्द पहले भी सुने थे। मेरे दिमाग को उचित शब्द जानने और उसमें अभ्यस्त होने के लिए लाइनों और शब्दों पर ज्यादा ध्यान देने की आदत पड़ गई है। मेरे लिए, मुझे दी गई लाइनें ही भाषा है।

मैं हमेशा ही एक भयभीत एक्टर रहा हूं क्योंकि मैंने अपने करियर की शुरुआत ऐसे बड़े एक्टर्स के साथ की थी, जिनके पास सबकुछ था। मुझमें हमेशा से ही एक डर था, जिसमें नई चीजों को अपनाने में मेरी काफी मदद की। मैं जल्दी सीखता हूं और मैं सबकुछ तेजी से हासिल किया है। मैं हमेशा ही कड़ी मेहनत पर विश्वास किया है और इस वजह से, मेरे काम और कड़ी मेहनत पर ध्यान दिया गया और उसकी प्रशंसा की गई, जिस वजह से मुझे ऐसे बहुभाषायी और विभिन्न पहलुओं वाली भूमिकाएं मिली हैं। व्यक्ति को बदलते समय के साथ चलना होता है और प्रासंगिक बने रहने के लिए लगातार खुद को खोजना पड़ता है। व्यक्ति को अपने काम को गंभीरत से लेना चाहिए, अनुशासित रहना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए, जो अंतत: एक्टर को वृद्धि करने में मदद करता है। मैं मानता हूं, कि थोड़ी मात्रा में डर, हमें ज्यादा हासिल करने और ज्यादा नई चीजों को सीखने में मदद करता है।

आपने सिनेमा और टेलीविजन, दोनों ही माध्यमों में काम किया है। आपके अनुसार, एक कलाकार के तौर पर, कौन सा माध्यम ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा है और क्यों?

सिनेमा और टेलीविजन के बीच कोई तुलना नहीं है। 70मि.मी. के क्लोजअप की बराबरी करना आसान नहीं है और इनमें तुलना करना उचित भी नहीं है। लेकिन टेलीविजन पर, शूट्स के दौरान काफी यात्रा करना होता है, खासतौर पर एक सेट से दूसरे में जाना जो जटिल होता है। साथ ही, टेलीविजन में, मैं यह देख रहा हूं कि कुछ नए एक्टर्स अपने काम को काफी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और उनमें निर्धारित स्तर पर समर्पण की कमी है। थोड़ा सा समर्पण और प्रतिबद्धता निश्चित तौर पर दूर तलक ले जाएगा। जब आप सिनेमा में जाते हैं, तो आपका व्यक्तित्व एक अलग आकार लेता है और कई सारे प्रतिभाशाली एक्टर्स के साथ निर्माण का उत्पाद भी काफी ऊंचा होता है। उस स्तर की बराबरी कर पाना कठिन होता है, लेकिन केवल कड़ी मेहनत से आप ऐसा कर सकते हैं। टीवी और सिनेमा दोनों ही बिल्कुल अलग माध्यम हैं। इस पर ध्यान दिए बिना, व्यक्ति को अनुशासन और समर्पण से अपने मार्ग पर काम करना होता है।

इस समय जिन अन्य प्रोजेक्ट्स पर विचार कर रहे हैं, उनके बारे में हमें बताएं?

अभी मैं मलाला पर एक बड़े बजट की डॉक्यूमेंट्री पर काम कर रहा हूं, जिसमें एक केन्द्रीय किरदार निभा रहा हूं। इसके अलावा, मैं दो हिंदी फिल्मों में भी काम कर रहा हूं, जिनमें से एक रफ्तार नामक खेल पर आधारित है। मैं चिरंजीवी के साथ एक साउथ मूवी पर भी काम शुरू करने जा रहा हूं। असल में, मैंने अपने काम और समय में संतुलन बनाने के लिए अपने अंदर कई सारे बदलाव किए हैं, लेकिन साथ ही मैं उन विभिन्न प्रोजेक्ट्स को जारी रखता और पूरा करता हूं, जो मेरे पास हैं।

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