तापसी पन्नू इन्टरव्यू

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Taapsee Pannu interview

Taapsee Pannu interview

दर्शक यह अंदाजा लगा रहे हैं कि लड़की फिल्म की हीरो हो सकती है? अब वे ये नहीं पूछते, हीरो कौन है?

एक बार फिर एक एक्टर को विशेष रोल में देखा गया! चलन ये है कि दर्शक नए रोल में देखना ही नहीं चाहते! आठ साल पहले साउथ में अपनी पहली फिल्म करने के बाद अब तापसी पन्नू पूरी तरह से बॉलीवुड में अपना कैरियर बनाने पर फोकस कर रही हैं। इस एक्ट्रेस ने पिंक (2016), जुड़वां-2 (2017) और आने वाली फिल्म दिल जंगली जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। ऐसी भूमिकाओं से उनके उत्साह को नए पंख मिल रहे हैं और दर्शकों को नायिका प्रधान फिल्मों में उन्हें देखने का अवसर मिल रहा है। तापसी ने बातचीत करते हुए कहा कि मेरी फिल्म मनोरंजक विषय वाली हो सकती है, जिससे आत्मनिरीक्षण की जरुरत होती है। लेकिन, मैं दर्शकों को आश्वस्त कराना चाहती हूँ कि अगर मैंने कुछ किया है, तो वो उनके समय और पैसे के साथ न्याय है।

Taapsee Pannu interviewहालांकि दिल जंगली अगले हफ्ते स्क्रीन पर उतरेगी, लेकिन इस साल आपकी रिलीज होने वाले वाली फिल्मों में स्पोर्ट्स बायोपिक सूरमा, देशभक्ति पूर्ण फिल्म मुल्क और रोमांटिक फिल्म मनमर्जियां भी हैं। क्या ये महज संयोग है या आपकी पसंद?

जब किसी कलाकार को एक बार किसी विशेष रोल में देख लिया जाता है तो इंडस्ट्री में प्रवृति है कि उसे उसी तरह की भूमिकाओं में देखा जाए! यह सुविधाजनक है और संभवतः नये प्रयोग से बचने के लिए भी किया जाता है। लेकिन, सौभाग्य से मेरे मामले में ऐसा नहीं है। दर्शकों ने मुझे पिंक (2016) में चुनौतीपूर्ण किरदार में देखा और इसके बाद जुड़वां-2 (2017) जैसी व्यावसायिक मनोरंजन फिल्म में भी स्वीकार किया।

आप चार साल से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में हैं। इन सालों में आप इंडस्ट्री में कौनसे बड़े बदलाव देख रही हैं?

दर्शक पहले की अपेक्षा समझदार हो गए हैं। वे गोलमाल और जुड़वां-2 जैसी फिल्मों को भी पसंद करते हैं और न्यूटन और हिंदी मीडियम जैसी फिल्म को भी अस्वीकार नहीं करते, जिन्हें कला फिल्में कहा जाता है। एक एक्ट्रेस के रूप में यह मेरे लिए अच्छा अनुभव है कि दर्शकों ने एक महिला प्रधान फिल्मों के लिए भी दरवाजे खोल दिए हैं। लोग यह महसूस करने लगे हैं कि एक लड़की भी फिल्म की हीरो हो सकती है। अब, ये जरूरी नहीं कि वे पूछे कि फिल्म का हीरो कौन है? अक्षय कुमार जैसे बड़े स्टार भी ऐसे विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो पहले नहीं किए गए! इसके अलावा, यदि इंडस्ट्री एक्टरों को सही अवसर देने के लिए सही कदम नहीं उठाता है तो उनके पास ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आने का भी मौका है। इसके अलावा, अब एक्टर्स अपने रोल को लेकर भी बहुत ज्यादा निडर हो गए हैं।

Taapsee Pannu interviewआपने पिंक जैसी फिल्म में काम किया है जिसमे महिलाएं खुद के लिए खड़ी होती हैं। दूसरी तरफ, बहुत सी कमर्शियल हिंदी फिल्में की जिनकी आलोचना की गई की वे सेक्सिस्ट और महिला विरोधी हैं। कुछ समीक्षकों का ये भी कहना है कि जुड़वां-2 लैंगिक फिल्म है?

मैं जुड़वां-2 जैसी फिल्मों की समीक्षाओं को क्यों पढ़ना चाहूँगी? इस फिल्म को आलोचनात्मक प्रशंसा प्राप्त करने के लिए तो नहीं बनाया गया था। मुझे ऐसी फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता साबित करने की जरुरत भी नहीं है, जैसा कि मैंने पहले भी कहा था। मैंने केवल यह देखा कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कितना बिजनेस किया था। हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है। लेकिन, अपना असली काम दिखाने और उसका जश्न मनाने के बीच अंतर है। यदि किसी एक्टर ने अच्छा काम नहीं किया है तो हम उसे तो प्रोत्साहित नहीं करेंगे वाह वाह क्या किया है। हम इसे वीर या आदर्शवादी के रूप में भी चित्रित नहीं कर रहे हैं। और न ये पूरी तरह काला या सफेद है। इसलिए यह दर्शकों के समझने की बात है कि क्या सही और क्या गलत! यह पूरी तरह से धारणा पर निर्भर करता है साथ ही, हमने हर फिल्म को छलनी लगाना तो शुरू कर ही दिया है। बाल की खाल निकलने का काम हो तो हो ही रहा है। हर फिल्म में एक खलनायक होता है जो सबसे ज्यादा निर्ल्जता वाले काम करता है। लेकिन, हमें इस सबसे कोई मतलब नहीं, क्योंकि वो वरुण धवन जैसा बड़ा नाम नहीं है।

यह सच है कि एक एक्ट्रेस के रूप में आपको भी लगता है कि फिल्मों के जरिए दर्शकों को प्रभावित नहीं किया जा सकता?

एक बात ये है कि जो दर्शक 200 रुपए खर्च करके मेरी फिल्म देखने आना चाहता हैं ये पसंद वाली बात है जिनके लिए मुझे कुछ करना है। मेरी फिल्म मनोरंजक विषय वाली हो सकती है, जिसके लिए आत्मनिरीक्षण की जरुरत होती है। लेकिन, मैं दर्शकों को आश्वस्त कराना चाहती हूँ कि अगर मैंने कुछ किया है, तो वो उनके समय और पैसे के साथ न्याय है।

हॉलीवुड में एक्ट्रेसेस को यौन उत्पीड़न के बचे रहने के लिए प्रेरित किया जाता है। ये भी माना जाता है कि ऐसे शिकारी हर जगह मौजूद हैं। क्या आपको लगता है कि हमारी इंडस्ट्री में भी पश्चिम की ऐसे मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया जाना चाहिए?

सबसे पहले तो एक बात ये कि उनकी तुलना में हमारी संस्कृति अलग है। हमारे यहां कई एक्ट्रेस फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हैं, और वे अपने परिवारों के कारण इस तरह के मुद्दों को उठाने में संकोच करती हैं। यदि वे यहां यौन उत्पीड़न के बारे में बात करती हैं, तो यहाँ ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है कि फिल्म इंडस्ट्री माफिया गिरोह है। कई बार, यदि वे आवाज उठाती हैं तो इसे पब्लिसिटी स्टंट भी माना जा सकता है। लड़कों की तुलना में लड़कियों के साथ ज्यादा सख्ती से पेश आया जाता है। इसलिए मुझे यह भी लगता है कि कई लड़कियों ने अपनी ताकत का दुरुपयोग किया है, इसलिए सामने वाले को ये डर भी रहता है कि वे स्वयं के पक्ष में पीड़ित-कार्ड खेलकर अपने लिए सहानुभूति बटोरकर कोई भी आरोप लगा सकती हैं। लेकिन, अगर वे आवाज नहीं उठाती हैं तो भी मामला आगे बढ़ता है। दरअसल, हम एक अजीब स्थिति में है, जिससे निपटने का एक तरीका शायद ये भी है कि हम स्मार्ट हों और अपने तरीके से इसका निपटारा करें।

इस साल आपकी रिलीज होने वाली फिल्मों का तांता लगा है, क्या आप बॉक्स ऑफिस पर अपने भविष्य को लेकर परेशान है?

वैसे तो मैं पिछले चार साल से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रही हूँ, लेकिन साउथ में मुझे अपना कैरियर शुरू किए करीब आठ साल हो गए। मैंने बहुत सी हिट और फ्लॉप को देखा है तो, मैं इस तरह की चीजों को संभालने में खुद को बेहतर समझती हूँ। मुझे नहीं लगता कि कोई एक्टर ये कहे कि मुझे तो फर्क ही नहीं पड़ता। ऐसा है तो वो एक्टर झूठ बोल रहा होता है क्योंकि कुछ गड़बड़ी है तब तो फर्क नहीं पड़ता! इस साल मेरी कई फिल्में रिलीज होंगी और मैं उम्मीद कर रही हूँ कि इनमें से कुछ तो चलेंगी।

जबकि आपकी प्रोफेशनल लाइफ ऊंचाई पर है? आप अपनी शादी के बारे में क्या सोचती हैं?

’ मैं जल्दी शादी नहीं करने वाली। जब मैं शादी करने का निर्णय लूंगी तो इसे मीडिया की चकाचैंध से दूर ही रखना चाहूँगी। मैं अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को अलग-अलग रखना चाहती हूँ। यही कारण है कि मैंने फिल्म इंडस्ट्री में किसी के साथ रिश्ते नहीं बनाए।

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