दोस्तों की तरह ही शब्द अपनी संगत की वजह से जाने जाते हैं : जावेद अख्तर

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Javed Akhtar host TED

यह मानना लगभग असंभव है कि एक लेखक के पास खुद को व्यक्त करने के लिये शब्द
नहीं हों। कुछ ऐसा ही हुआ जब जावेद अख्तर को ‘टेड टॉक्स इंडिया नई सोच’ में अपनी
बात रखने को कहा गया। इस लेखक, गीतकार को ‘पावर ऑफ वर्ड्स’ पर बोलने के लिये
बुलाया गया और मानो उनके होश उड़ गये, जब उनसे कहा गया कि उन्हें अपने सारे
अनुभवों को 5 मिनट की स्पीच में समेटना है।
हालांकि, जावेद अख्तर अपने अनुसार सही शब्दों का चयन करके अभिव्यक्त करना पसंद
करते हैं। लेकिन 5 मिनट की समयसीमा में दर्शकों से अपने अनुभव बांट पाना उनके लिये
लगभग असंभव था। ‘मुझे इतने सालों के अनुभव को 5 मिनट में समेटना था। यह
दिलचस्प होने के साथ-साथ मेरे लिये बहुत चुनौतीपूर्ण भी था। मैं उम्मीद करता हूं कि
लोगों को मेरा बोलना पसंद आयेगा।’
उन्होंने अपनी बातचीत में कहा, ‘दोस्तों की तरह ही शब्द अपनी संगत की वजह से जाने
जाते हैं। शब्दों को देखकर आप कह सकते हैं कि वाक्य सकारात्मक हैं या नकारात्मक।
इसलिये, हमें शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिये, क्योंकि हर शब्द की
एक प्रतिक्रिया होती है।’

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