मकर संक्रांति पर उद्धरण

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Sameeksha as Olympias in Porus_

रिश्ता लिखेंगे हम नयाकी दीया

‘मेरे लिए मकर संक्रांति का बहुत महत्व है। राजस्थान से मेरा खास जुड़ाव रहा है, यहां तक कि मेरे बहुमूल्य शो की शूटिंग भी वहां की गई थी। हम सभी ने पतंग उड़ाने और स्वादिष्ट पकवान खाने के लिए एक साथ आए, और जश्न मनाते हुए खूब मस्ती की है। मेरी पसंदीदा मिठाई तिलगुल है जो हम घर पर बनाते हैं और सब को बांटते हैं। यह शांति और खुशहाली का त्योहार है और नई शुरुआत के बारे में है। मैं तो बस पतंग उड़ाने के पूरे अनुभव का आनंद लेती हूं, मैं हमेशा से यह हर साल करती हूं और मैं इसमें अनुभवी बन रही हूं। इसमें सबसे अच्छी बात सुंदर और रंगीन पतंगों को आकाश में उड़ते हुए देखना है, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय और आनंदित बन जाता है।’

पोरस के सिकंदर

‘संक्रांति के दौरान पतंग उड़ाना सबसे मजेदार गतिविधियों में से एक है। निस्संदेह, यह मेरी पसंदीदा गतिविधि भी है। बचपन में, घर पर, मैं, मेरे दोस्त और पड़ोसी एक—दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक साथ छत पर आया करते थे। हर कोई काफी उत्सुकता से प्रतीक्षा किया करता था। हम सबसे रंगीन और चमकीली पतंगे खरीदने के लिए बाजार जाया करते थे, और कई बार उस पर अपना नाम भी लिखा करते थे। उन दिनों काफी मजा आया करता था; घंटों तक, हम इसमें पूरी तरह से खो जाया करते थे। इतने सालों में, काम के प्रति मेरे समर्पण ने भले ही मुझे व्यस्त रखा है और मैं संक्रांति में परिवार से दूर रहता हूं, लेकिन यहां मुंबई में जब भी मुझे समय मिलता है, तो हम यह त्योहार मनाने के लिए पतंगें उड़ाते हैं और ढेर सारी मिठाईयां खाते हैं।’

आशीष शर्मा, पृथ्वी वल्लभ

‘बचपन में संक्रांति के दौरान, हम हमेशा ही जिस चीज का इंतजार किया करते थे, वह थी पतंगे लाना और उन पर नाम लिखना। हर कोई अपनी पतंगों को अपने दिल से थाम लेता था और उसे छिपा लेता था। संक्रांति से एक रात पहले, हम अगले दिन अपने कजिन्स और दोस्तों के साथ पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता करने को लेकर काफी उत्साहित रहा करते थे। मैं वाकई उन दिनों को मिस करता हूं और मैं यह नहीं कहूंगा कि मुझे पतंग उड़ाने के लिए उतना समय मिला है जितना पहले मिला करता था लेकिन जब भी समय मिलता है, तो मैं ज्यादातर यही करता हूं। यह पूरा अनुभव और माहौल बहुत ज्यादा चमकीला और उत्साहजनक था। मुंबई में अपने घर वापस आने पर, मैं अपने दोस्तों के साथ पतंगे उड़ाता हूं और ढेर सारी मिठाईयां खाता हूं, बशर्ते मैं शूटिंग में न होऊं।’

 ‘हासिलके कबीर रायचंद

हर साल मैं पतंगें उड़ाने के लिए अहमदाबाद जाता हूं, यहां पूरा वातावरण उत्सवमय होता है और हर कोई उत्साही ऊर्जा से भरपूर होता है। इस साल, मैं ‘हासिल’ के कसे हुए कार्यक्रम की वजह से अहमदाबाद जाना मिस करूंगा। पतंगे उड़ाने गुजरातियों के खून में है। हालांकि, इस साल मैं शायद सेट्स पर ही पतंगे लाऊं और उन्हें उड़ाऊं क्योंकि हम शूटिंग करते रहेंगे।

 

 मेरे सांईमें बाइजा मां

‘गुजरात में मकर संक्रांति के त्योहार को उत्तरायण उत्सव के नाम से जाना जाता है, और यह हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। मेरे लिए इस साल दोगुना उत्सव रहेगा। मैं ‘मेरे सांई’ में बाइजा मां का प्रमुख मराठी किरदार निभा रही हूं और मेरे सहकर्मी वैभव जी सेट पर सभी के लिए घर में बने तिलगुल लेकर आएंगे। और गुजराती होने के नाते, हम दोस्तों और परिवार के साथ घर पर बने खास गुजराती व्यंजनों और मिठाईयों के साथ घर में बड़े जश्न की योजना बनाएंगे। मैं हमेशा से ही अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में शामिल होने के लिए अहमदाबाद जाना चाहती थी, लेकिन किसी तरह से, मैं समय नहीं निकाल पाई। मैं वहां के खास पतंग बाजार में वाकई जाना चाहती हूं, और वहां दिखाई गई सभी प्रकार की पतंगे देखना चाहती हूं और उस विशाल प्रतियोगिता की साक्षी बनना चाहती हूं। यह मेरा एजेंडा है और यह मैं अगले साल करूंगी। इस साल घर और सेट पर यह साधारण जश्न रहेगा।’

लोहिड़ी के उद्धरण

जितिन गुलाटी, तैलप, पृथ्वी वल्लभ

लोहिड़ी पर — नवजात की पहली लोहिड़ी का बहुत ज्यादा महत्व है। लोहिड़ी के मेरे सबसे यादगार उत्सवों में से एक तीन साल पहले का है, जब मेरी भतीजी का जन्म हुआ था और मेरा विस्तृत परिवार और दोस्त इस नवजात को आशीर्वाद देने के लिए साथ आए थे। दिल्ली की सर्दियों के बीच जलते अलाव के साथ पूरे परिवार का मिलना परफेक्ट था, लंबे समय के बाद रिश्तेदारों से मुलाकात हुई थी, बेहतरीन खाना, मेरी दादी पंजाबी बोलियां सुना रही थी और हम ढोल की ताल पर नाच रहे थे।

निकिता दत्ता, आंचल, हासिल

‘लोहिड़ी के दौरान मैं ज्यादातर अपने माता—पिता के घर पर ही रही हूं। हम लोहिड़ी का उत्सव मनाने के लिए अपने लान पर रात को आग जलाते हैं। फूडी होने के नाते मेरा पसंदीदा हिस्सा उस मौसम में पॉपकॉर्न, मूंगफलियां और तिल लड्डू खाना है। हर साल हमारे के लिए लोहिड़ी बहुत खास होती है! मेरे पिता और उनकी बार-बार होने वाली पोस्टिंग्स की वजह से, मेरे पास पूरे भारत के विभिन्न शहरों में इसे मनाने की कई बेहतरीन यादे हैं, खास तौर पर दक्षिण में!’

समीक्षा, ओलिम्पियस, पोरस

‘बचपन में, हमारे लिए, लोहिड़ी हमेशा से ही नया साल मनाने की तरह थी। हम चंडीगढ़ के पास एक छोटे कस्बे में अपने दादा—दादी के घर जाया करते थे, जहां हमारे सभी पड़ोसी, दोस्त और परिवार भव्य उत्सव के लिए एक साथ आया करते थे। हमने हमेशा ही नए कपड़े खरीदते हैं, अपने पारंपरिक ढंग से तैयार होते हैं, बहुत धूमधाम से यह उत्सव मनाते हैं और गाते एवं नाचते हैं, इस उत्पाद के दौरान परफॉर्म करने के लिए कई दिन पहले से ही अपने एक्ट की तैयारी करते हैं।आमतौर पर, इस दौरान उत्तर भारत में काफी ठंड होती है, अलाव इस उत्सव का दिल है, क्योंकि यह न केवल आसपास के पूरे वातावरण को थोड़ा गर्म और आनंदित करता है बल्कि सर्दी के दिन खत्म होने के संकेत के रूप में भी काम करता है। लेकिन बच्चों के लिए हमारे लिए लोहिड़ी का सबसे हिस्सा पॉकेट मनी और गुड़ की मिठाईयां मिलना होता था। परिवार में बुजुर्गों द्वारा बच्चों को पैसा दिया जाना एक परंपरा थी। पूरा समुदाय एक साथ आता है और उत्सव बनाता है, जो इस त्योहार को खास ​बना देता है। यहां मुंबई में, मैं इस सारी मस्ती को मिस ​करती हूं क्योंकि यहां पर इतना बड़ा त्योहार नहीं मनाया जाता है।’

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