रामा के सामने एक और चुनौती

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Krishna Bharadwaj as rama in tenali rama

अपनी बुद्धिमानी और चालाकी से रामा हमेशा ही मुश्किल समस्याओं को सुलाझाने में कामयाब हो जाता है। लेकिन इस हफ्ते रामा का सामना एक बेहद ही मुश्किल मामले से होने वाला है।

आगामी एपिसोड में कृष्णदेव राय यह घोषणा करते हैं कि मकर संक्रांति के शुभ मौके पर विजयनगर में सभी देवी काली की पूजा करेंगे। हर साल की तरह इस साल भी महल से देवी के गहनों को मंदिर ले जाने के लिये यात्रा निकाली जाती है। तथाचार्य गहनों की उस पेटी को अपने सिर पर रखकर ले जाते हैं। यात्रा के दौरान गहनों की पेटी चोरी हो जाती है और उसकी जगह कोई दूसरी पेटी मिलती है। जब लोग मंदिर पहुंचते हैं, तो पाते हैं कि गहने चोरी हो गये हैं और उनके स्थान पर पेटी में पत्थर रखे हुए हैं।

दरबार में एक संदेश वाहक आकर बताता है कि भारत का सबसे दौलतमंद व्यक्ति धनंजय इस चोरी के पीछे है। वह राजा से कहता है कि धनंजय चाहता है कि कृष्णदेव राय अपने एक घुटने को मोड़कर उसके सामने झुके और जमीन का बड़ा-सा टुकड़ा सम्मान के साथ उसे सौंप दे। इसके बाद ही धनंजय गहनों की पेटी वापस करेगा। राजा इससे इनकार कर देते हैं और उस संदेश वाहक को कहते हैं कि धनंजय को युद्ध के लिये तैयार रहना होगा! राजा की आज्ञा के बिना ही रामा, धनंजय से मिलने पहुंच जाता है। वह उससे कहता है कि यदि वह उसे गहनों की पेटी वापस कर देगा तो वह उसके गूंगे पोते की बोली वापस ला सकता है। धनंजय पलटकर कहता है कि वह गहनों की पेटी के अलावा कुछ भी दे सकता है।

इस चुनौती के बारे में बताते हुए कृष्ण भारद्वाज (तेनाली रामा) कहते हैं, ‘विजयनगर की सुरक्षा और सम्मान के लिये रामा ने एक बेहद कठिन चुनौती ली है। उसे ‘करो या मरो’ वाली योजना तैयार करनी होगी। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि रामा, कृष्णदेव राय को शामिल किये बिना वह धनंजय को मना पाता है या नहीं।’

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