हमेशा खुद को महिलाओं से ऊपर समझते हैं पुरुष : नमिश

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Satya Namish Taneja

धारावाहिक ‘इक्यावन’ के जरिये छोटे परदे पर वापसी करते हुए नमिश काफी खुश नजर आ रहे हैं। ‘इक्यावन’ चार पुरुषों की अनोखी परवरिश, सुशील और सत्या की कहानी है।  इस शो में वे सत्या का किरदार निभा रहे हैं, जो काफी चुनौतीपूर्ण है। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ अंश :

टीवी पर एक साल बाद वापसी करने पर कैसा महसूस हो रहा है?

इससे पहले मैंने जो किरदार निभाया था, उसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था और काफी तारीफें भी मिली थीं। मुझे ऐसा महसूस हुआ कि लोग मुझसे बेहद प्यार करते हैं। ‘इक्यावन’ के जरिये छोटे परदे पर वापसी करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। इस शो में मेरा किरदार चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वो आत्मकेंद्रित और दूसरों का ध्यान चाहने वाला व्यक्ति है। उसमें ये दोनों चीजें अपनी दादी के कारण आई है, जिसकी वजह से वो औरों से खुद को बेहतर समझता है। सुशील के साथ उसकी केमेस्ट्री बड़ी ही दिलचस्प है, जहां वह हमेशा स्वयं को असहज महसूस करता है, क्योंकि जिन प्रतियोगिताओं को सत्या जीतने की कोशिश करता है, वो सारी जीत जाती है।

सत्या के अपने किरदार के बारे में कुछ बतायें और ये किस तरह अलग है?

हमारे समाज में, पुरुष हमेशा खुद को महिलाओं से ऊपर समझते हैं और इसलिये महिलाओं को एक खास तरह के सांचे में ढालकर रखना चाहते हैं। मेरा किरदार युवा लड़कों की कहानी कहता है, जिन्हें दूसरों का ध्यान पाने की चाहत रहती और जो आत्मकेंद्रित होते हैं। सत्या की परवरिश उसकी दादी ने की है, जो उसे जरूरत से ज्यादा प्यार करती है और उसे हमेशा विश्वास दिलाती है कि वो इंसानियत के लिये भगवान का उपहार है। और इसलिये वो हर तरह की खुशी का हकदार है। वैसे वो अपने करीबियों और सच्चे दोस्तों के लिये लोगों से भिड़ भी जाता है। लेकिन, वो पुरुष और स्त्री में भेदभाव करता है, और इसलिये वो सुशील से डर जाता है, क्योंकि सुशील वो सारी प्रतियोगिताएं जीत लेती हैं, जिसमें वो हिस्सा लेता है। वो हमेशा उसकी खिंचाई करता है और उसका मजाक उड़ाता रहता है कि वो बाकी बाकी लड़कियों जैसी नहीं है।

प्राची तहलान (सुशील) के साथ आपकी केमेस्ट्री कैसी है?

प्राची मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं और बहुत अच्छी कलाकार भी। हमारे बीच सबकुछ बहुत अच्छा चल रहा है और ये बात हमारी ऑनस्क्रीन केमेस्ट्री में साफ झलकती है। काफी सारे लोगों ने मुझसे कहा कि इस शो के दो हीरो हैं- सुशील और सत्या, लेकिन मुझे लगता है कि वो असली हीरो हैं, क्योंकि उन्होंने महिलाओं के प्रति लोगों की सोच को चुनौती देने का बीड़ा उठाया है और मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला है।

इस शो के कंसेप्ट के बारे में कुछ बतायें?

‘इक्यावन’ चार पुरुषों की अनोखी परवरिश, सुशील और सत्या की कहानी है। सत्या के परिवार वाले पारीख परिवार की सभी महिलाओं की मौत के जिम्मेदार हैं। ये कहानी दोनों ही किरदरों की जिंदगी बयां करती है। साथ ही अपने अलग-अलग रूपों वो कितने अनूठे हैं, ये कहानी उसके बारे में बताती है। सुशील की बात करें तो वो बाकी दूसरी लड़कियों से अलग है और उसमें लड़कों जैसी आदतें हैं, जब सत्या की बात करते हैं तो वो एक आकर्षक नौजवान है और लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश करता रहता है। ये शो गुजरात के सबसे रंगीले शहरों; कच्छ और अहमदाबाद की पृष्ठभूमि पर बनी है। जिसमें उन क्षेत्रों के जीवन, रंग-बिरंगी और अनूठी गुजराती संस्कृति को प्रस्तुत किया गया है।

सत्या का किरदार असली हीरो की तरह नहीं है, उसमें कुछ ग्रे शेड्स भी हैं। इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

मुझे लगता है कि सत्या के इसी रूप को निभाना सबसे चुनौतीपूर्ण है। वो निश्चित रूप से पूरी तरह नकारात्मक नहीं है और ना ही पूरी तरह से सकारात्मक। उसका व्यवहार और सोच पूरी तरह अपनी दादी से प्रेरित है, जिसने उसके अंदर बदले की भावना भर दी। उसकी दादी सारी जिंदगी एक विजेता की तरह रही है। अपने दोस्तों और परिवार वालों को लेकर उसका रक्षात्मक रवैया उसके किरदार का हिस्सा है, लेकिन आमतौर पर उसकी नकारात्मकता उस पर हावी हो जाती है। सत्या का किरदार निभाते हुए मुझे बेहद खुशी महसूस हो रही है क्योंकि इससे पहले मैंने टेलीविजन पर इस तरह का किरदार नहीं निभाया है।

इस किरदार में खुद को ढालने के लिये आपको किस तरह की तैयारियों से होकर गुजरना पड़ा?

एक पुरुष होने के नाते और इस समाज का हिस्सा होने के नाते, जहां व्यापक रूप से ये माना जाता है कि पुरुष और महिला के बीच बराबरी नहीं है, मैं खुद को सत्या से जोड़कर देख पाता हूं। मैंने कहानी को समझने और किरदार में खुद को ढालने की कोशिश की है। मुझे पता है कि मेरे ऊपर उस किरदार को निभाने की जिम्मेदारी है, जो समाज के आम लोगों की सोच को सामने ला सके। ये सचमुच काफी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मैं किरदार की तरह बिलकुल भी नहीं हूं।

हम जिस तरह के समाज में रहते हैं, उसमें सत्या का किरदार कितना वास्तविक है?

कम उम्र के लड़के, जिन्हें परिवार में बड़े ही लाड़-प्यार और अत्यधिक महत्व के साथ पाला जाता है, ऐसे लड़के आसानी से लोगों के बहकावे में आ जाते हैं। साथ ही लड़कियों से अक्सर एक खास तरह के व्यवहार और तौर-तरीकों की उम्मीद की जाती है, जिसे कि इस शो में चुनौती दी गई है। साथ ही सत्या का किरदार अक्सर सुशील को देखकर चकित रह जाता है और उससे डरता है, क्योंकि वो अलग है। वो खुद को उसी रूप में पसंद करती है, जैसी वो है। इससे सत्या उसे हर स्थिति में हराने/उससे जीतने की जिद पर अड़ा रहता है।

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