Mukesh Tiwari Interview

0
482
Mukesh Tiwari in Band Baja Bandh Darwaza

मुझे लगता है कि आज टेलीविजन इंडस्‍ट्री किसी भी अन्‍य इंडस्‍ट्री की तुलना में अधिक बड़ी हैयह कहना है सोनी सब के बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’’ के मुकेश तिवारी उर्फ संजीव शर्मा का. शो के सेट्स पर उनसे विस्तार मैं बातचीत हुई और इत्मीनान से मुकेश तिवारी ने सभी वाजिब  सवालों के जवाब दिए.

 बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ का कॉन्‍सेप्‍ट क्‍या है?

‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ एक हल्‍की-फुलकी हॉरर कॉमेडी है। यह पूरी तरह से ह्यूमर होने की बजाय एक सिचुएशनल कॉमेडी है।

 अपने किरदार संजीव शर्मा के बारे में कुछ बतायें।

 संजीव शर्मा एक आम मिडिल-क्‍लास परिवार से ताल्‍लुक रखता है। जीवन से उसकी ज्‍यादा ख्‍वाहिशें नहीं हैं, हालांकि बदकिस्‍मती से उसकी शादी वाले दिन उसकी होने वाली दुल्‍हन भाग जाती है। जीवन में उसकी केवल एक ही इच्‍छा थी, पैसे कमाना और घर बसाना, लेकिन दुर्भाग्‍य से घर बसाने का उसका सपना अधूरा ही रह जाता है। इसलिये, मरने के बाद वह अपनी अधूरी इच्‍छा को पूरा करने आता है।

टेलीविजन पर कई सारे हॉरर कॉमेडी शो रहे हैं। क्‍या चीज इस शो को औरों से अलग बनाती है?

मैं यह नहीं कह सकता कि यह शो औरों से किस तरह अलग है, लेकिन यह कहना चाहूंगा कि इस शो की टीम और इसका लेखन अद्भुत है। इसे काफी अच्‍छी तरह लिखा गया है, जोकि समाज के मौजूदा स्थिति के अनुरूप है।

आप पहली बार इस तरह की भूमिका कर रहे हैं। आपने एक भूत के किरदार के लिये किस तरह तैयारी की?

मेरे लिये, भूत को वास्‍तविक दिखाना जरूरी था। इस भूत के अलग से दांत या सींग नहीं हैं; वह ज्‍यादातर समय इंसानों की तरह दिखता है और उसमें भूतों जैसी बहुत कम बात है। मैंने इस भूमिका के लिये कुछ जगहों से प्रेरणा भी ली, जैसे ‘मम्‍मी’ फिल्‍म की काफी झलक इस किरदार में नज़र आती है। काफी रिसर्च करने के बाद, हमने भूत को एक अच्‍छे इंसान के रूप में तैयार किया, जोकि दूसरों को इस हद नुकसान नहीं पहुंचाता कि वे उससे उबर ही ना पायें। इसकी वजह वह कॉमिक रूप में लोगों को बस डराने की कोशिश करता है।

यदि आप संजीव की जगह होते तो दिल टूटने का सामना किस तरह करते?

मैं इस तरह की चीजों को गंभीरता से नहीं लेता। बतौर कलाकार, आमतौर पर आप इस तरह के मुद्दों की बहुत परवाह नहीं करते, क्‍योंकि आप अलग हैं और एक अलग तरह की जिंदगी जी रहे हैं। मैं एक सामान्‍य जीवन जीने का बोझ नहीं लेता हूं और हमेशा ही असामान्‍य जीवन जीता हूं। असामान्‍य का मतलब यह नहीं है कि उसमें कुछ सुधार की जरूरत है, लेकिन कहने मतलब है कि मैं बेहद हल्‍के रूप में जीवन जीता हूं। थियेटर करने के दौरान, मुझे 5 दिनों तक भूखा भी रहना पड़ा था। हालांकि, उस समय मुझे ऐसा नहीं लगा था कि मैं भूख की वजह से मर जाऊंगा, क्‍योंकि यह जीवन का हिस्‍सा है। मैं ऑडी खरीदने के लिये या एक पेंट हाउस खरीदने के लिये कभी जिंदगी नहीं जी। मेरी पहली प्राथमिकता हमेशा ही एक्टिंग रही है , बाकी चीजें तो समय के साथ आ ही जायेंगी।

क्‍या आप किसी से बदला लेने के स्‍तर तक जायेंगे?

नहीं, कभी नहीं जाऊंगा।

इस शो से आपकी क्‍या उम्‍मीदें हैं और आपको क्‍या लगता है कि दर्शकों को इस शो में क्‍या पसंद आयेगा?

इस शो से मेरी काफी ज्‍यादा उम्‍मीदें हैं, सिर्फ इसलिये नहीं कि मैं इसमें काम कर रहा हूं, बल्कि इसलिये कि इसे बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया है। साथ ही यह विशुद्ध कॉमेडी नहीं है, जिसे कि आप देखें और खूब ठहाके लगायें। उसकी बजाय यह आपके चेहरे पर मुस्‍कान लाता है और कई बार आपको गुदगुदाता है। इस शो का कंटेंट आज की पीढ़ी के अनुरूप है।

आप ज्‍यादा क्‍या पसंद करेंगे- फिल्‍में या फिर टेलीविजन?

मेरे लिये कंटेंट और अच्‍छा काम सबसे ज्‍यादा मायने रखता है। यदि कोई ‘मिर्जा गालिब’ या ‘भारत एक खोज’ दोबारा बनाने की योजना बना रहे हैं तो मैं उनमें भी काम करना पसंद करूंगा। यह स्‍वाभाविक है कि फिल्‍मों में जादू होता है और आप सिनेमा हॉल में हर फिल्‍म के लिये दर्शकों की प्रतिक्रिया देखते हैं,वहीं जब आप अकेले टेलीविजन देख रहे होते हैं तो इस तरह की प्रतिक्रिया नहीं देख सकते। इन दोनों के बीच यही एकमात्र फर्क है।

आप किस ज़ोनर में काम करना पसंद करेंगे?

मुझे वह सारी भूमिकाएं पसंद हैं जोकि मुझे मेरे कम्‍फर्ट ज़ोन से बाहर निकालती हैं। कई सारे लोग यह शिकायत करते हैं कि वह कुछ भूमिकाओं को करने में सहज महसूस नहीं करते, लेकिन मैं एक्टिंग में इसलिये नहीं आया कि अपने कम्‍फर्ट ज़ोन में रहूं। कॉमेडी मेरे व्‍यक्तित्‍व के अनुरूप चीज नहीं है, लेकिन मैं खुद को उसके लिये ढालता हूं। यह बेहद दुखद है कि दर्शक उन कलाकारों को सम्‍मान नहीं देते हैं जोकि कॉमेडी करते हैं और उन्‍हें महत्‍व नहीं देते। कॉमिक भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों की तुलना में गंभीर और गहरी भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों को काफी गंभीरता से लिया जाता है।

आप उन लोगों को क्‍या कहना चाहेंगे जोकि भूतों या डरावनी चीजों से बहुत ही आसानी से डर जाते हैं?

मैं आपसे यह कहना चाहूंगा कि एक ही जिंदगी मिली है, इसलिये खुद पर भरोसा करके अपने डर को कम करें।

क्‍या आपके किरदार और वास्‍तविक जीवन में कोई समानताएं हैं?

बिलकुल नहीं। हालांकि, मैं जिस तरह से इस किरदार को आकार दे रहा हूं वह बेहद साधारण होगा और वह ऐसा किरदार होगा जोकि अपनी सीमाएं जानता है, जोकि मेरे जीवन से मेल खाता है। मेरा यह मानना है कि जब आप दूसरों को मान देंगे तभी आपको औरों से मान मिलेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here