अभिनय से प्यार नहीं तो आगे बढ़ नहीं सकते : राहुल शर्मा

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स्टार भारत पर प्रसारित हो रहे प्रत्येक शो में एक नए विषय को प्रस्तुत करने का प्रयास
किया गया है। नया शो ‘काल भैरव रहस्य’ एक और नए कान्सेप्ट केक साथ तैयार किया
गया है। यह शो भूतप्रेत का किस्सा नहीं है और इसमें कोई पराशक्तियों को भी नहीं
दिखाया गया है। सूर्यास्त के बाद मंदिर में आने वाले क्यो काल भैरव के क्रोध का शिकार
बनते है और काल भैरव उन्हें क्यो दंडित करते है इसी रहस्य का सच सामने लाने के लिए
राहुल नाम का किरदार प्रयास करता है। राहुल शर्मा इस शो में राहुल की भूमिका कर रहे
हैं उनसे हुई बातचीत के अंश-

काल भैरव दंडित करते हैं यह एक मिथ है या कुछ और?
शो में राहुल का मानना है कि भगवान तो आशीर्वाद देते है मदद करते है फिर वे दंडित
कैसे कर सकते है यह बात लोग क्यों नहीं समझते है रहस्यमय गतिविधियों को देखकर
लोगो को कुछ विचार क्यों नहीं आता है। राहुल इस रहस्य पर से परदा उठाने की
कोशिश करता है और कैसे गांव के लोग धीरे-धीरे उसके साथ हो जाते है और राहुल यह
सच सबके सामने लाने के लिए क्या करता है। एकदम नया कान्सेप्ट है और दर्शकों की
उत्सुकता बनी रहेंगी।

यह कहानी वास्तविकता पर आधारित है क्या और शो इस टाइप का है?
यह एक फिक्शन है इसके कोई वास्तविक आधार नहीं है पूर्ण रुप से काल्पनिक है।
सिद्धपुर नाम का गांव भी काल्पनिक हैं। यह भूतप्रेत की कहानी भी नहीं है और कोई
पराशक्ति का रहस्य भी नहीं हैं। इसमें सिर्फ रहस्य है और जब आप शो देखेंगे तो उत्सुकता
बनी रहेगी की कालभैरव के दंड का रहस्य क्या है और सच धीरे-धीरे सामने आएगा।
आप भगवान का कितना मानते है और भगवान से डरते हैं क्या?
मैं भगवान से डरता नहीं हूं उनको प्यार करता हूं क्योंकि मैं भगवान से कुछ मांगता नहीं
हूं। लोग जब कुछ गलत करते हैं या स्वयं पर विश्वास नहीं होता है तब भगवान से डरते है
अथवा लालच से उनसे कुछ मांगते है। जब आप भगवान को अपना विश्वास बना लेते हो
तो एक विशेष एर्नजी बनती है और वहीं सब काम करती है। मेरा मानना है कि दुनिया में
यह एनर्जी है आप इसे किसी भी धर्म का नाम दे सकते है यह बहुत पावरफुल होती है।
आप इसमें कितना विश्वास करते है और इस एनर्जी से कितना कनेक्ट है उसी पर आपके
काम की सफलता निर्भर करती हैं।

आप किस्मत को कितना मानते है इससे जुड़ी कुद विशेष घटना?
लोग कहते है कि किस्मत जैसा कुछ नहीं होता है परन्तु लक होता है क्योंकि मेरे साथ यह
हुआ है। मेरे पहले शो कहानी चन्द्रकांता की में मुझे प्रमोशन के बाद निकाल दिया गया।
में अंदर से टूट गया और जिस कशमकश में हम होते है उसी में हमारे माँ-बाप रहते है वे
भी परेशान हो गए। फिर मैंने सोचा कि मेरे पास दो विकल्प है टूट जाओ और स्वयं को
फिर से खड़ा करके ऐसा बनाओ कि दुनिया देखें। मैंने भी सोचा कि में एक्टर नहीं हूं पर
अब एक्टर बनकर दिखाऊगा। कुछ समय बाद ही मुझे शो में वापस लिया गया क्योंकि
मुझे निकालकर जिस लड़के को लिया गया था उसे मजबुरी में घर वापस जाना पड़ा और
मेरे अलावा उस समय कोई विकल्प नहीं था। लोग इसे संयोग कह सकते हैं। पर में इसे
किस्मत मानता हूं।

आपके अब तक के सफर के बारे में बताए?
राजस्थान में जयपुर के पास छोटे से शहर दौसा का हूं वहीं से साइन्स में बेचलर किया।
एक्टर बनने का कोई इरादा नहीं था। दो माह की छुट्टियों में दोस्त ने कहा थियेटर का
कोर्स कर ले आत्मविश्वास बढ़ेगा व व्यक्तित्व में निखार आएगा। इन दो महिनो में प्रसिद्ध
लोगों से बहुत कुछ सीखा और मैंने अभिनय को केरियर बनाने का निर्णय ले लिया। मुझे
लगा कि इस क्षेत्र में एक ही जीवन में कितनी जिन्दगीयों को जीने का अनुभव मिलता है।
दो वर्ष थियेटर करके मुंबई आ गया। दो वर्ष तक बहुत संघर्ष किया फिर भगवान के
आर्शीवाद से गाड़ी चल पड़ी और यह पांचवा शो है जिसमें मुख्य भूमिका कर रहा हूं।
अभिनय में करिअर व नौकरी दोनो में क्या फर्क है क्या श्रेष्ठ है?
अभिनय से प्यार नहीं उसमें विश्वास नहीं तो आगे नहीं बढ़ सकते है और नौकरी में भी
प्रतिदिन एक ही काम करना आसान नहीं होता है, दोनो अपनी जगह अलग है। मैं युवाओं
को एक सुझाव जरुर देना चाहता हूं कि अभिनय के क्षेत्र में आने से पहले अपनी पढ़ाई
पूरी कर ले अपनी रुचि व योग्यता के अनुसार जो भी सीखना चाहे सीख ले क्योंकि यदि
अभिनय में सफलता नहीं मिलती है तो वापस जाकर दूसरा काम कर सकते हो। लाइफ में
हमेशा प्लान बी भी होना चाहिए, मरे पास प्लान बी नहीं था पर खुशकिस्मती से मुझे
उसकी जरुरत नहीं पड़ी।

आप अभिनेता रणवीर सिंग जैसे दिखते है इसका कोई अनुभव है?
बहुत लोग मुझे यह कह चुके है जिसमें कई बड़े व प्रसिद्ध लोग भी हैं जब मेरे बाल लम्बे थे
तब मेरी रणवीर सिंह से बहुत तुलना होती थी मुझे भी अच्दा लगता था। वो फिल्मों के
सफल अभिनेता है यदि भगवान ने चाहा तो किसी फिल्म में रणवीर बड़े भाई व छोटा
भाई बनकर साथ काम करेंगे।
फिल्म में जाने को विचार है क्या और स्वयं को टीवी में कितना सेटल मानते हैं?
अभिनय के क्षेत्र में जो भी आता है वह हमेशा फिल्मों से आर्कषित रहता हैं। मुझे लगता है
कि टीवी में दर्शकों से कनेक्टीविटी आसान होती है। फिल्म के बारे में आगे सोचेगे अभी
तो काल भैरव के रहस्य को सामने लाना है। एक व्यक्ति के रुप में काम पाने व उस काम
को करने में इतनी चुनोतियों का सामना किया है कि में एक मोटीवेशनल स्पीकर बन
सकता हूं। प्रत्येक शो में नया थीम, नया अंदाज व नया लुक होता है तो उसको परफेक्ट
बनाने के लिए मेहनत करते है ताकि लोगों में उत्सुकता बनी रही। काल भैरव का रहस्य
शो के लिए मैंने 10 किलो वजन कम किया है यह शो बहुत चेलेन्जिग है तो राहुल के
किरदार को जीवन्त करने के लिए बहुत मेहनत कर रहा हूं।

अभिनय जगत में आपकी प्रेरणा कौन है?
मेरा मानना है कि किसी व्यक्ति को प्रेरणा बनाने की जगह प्रसिद्ध लोगों की विशेषता को
प्रेरणा बनाना चाहिए। मुझे देवानन्द साहब का आर्शीवाद मिला है। अक्षय कुमार की
एनर्जी सबसे अलग है वह मेरे लिए प्रेरणा है शाहरुख का काम के प्रति पेशन मुझे
आर्कषित करता है और गोविन्दा जी के कॉमेडी के टाइमींग बहुत परफेक्ट होते है। सभी में
कुछ न कुछ विशेष गुण होता है उसे पहचानकर ग्रहण करने की आदत होना चाहिए।

दौसा से मुंबई तक के सफर में राहुल कितना बदला और मुंबई शहर का क्या अनुभव
रहा?
मेरे विचारों में और मेरे दिमाग में जो भी अवरोध थे सभी दूर हो गए। अब में स्वयं को
मानसिक रुप से परिपक्कव मानता हूं। उम्र के साथ भी परिवर्तन होता है। मेरे पास
किताबीज्ञान ज्यादा नहीं है मैंने जो भी सीखा है जिन्दगी के अनुभव से सीखा है। दौसा के
राहुल की मासुमियत व संस्कार आज भी मेरे अंदर है उसे में कभी छोड़ना नहीं चाहता हूं।
मैं मुंबई आया और इस शहर ने मुझे अपना लिया। मुंबई के बारे में कहा जाता है कि यह
शहर जिसे अपना लेता है उसे दिल खोलकर देता है। मेरे लिए मुंबई बहुत लकी शहर हैं।

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