एंड टीवी के कलाकारों ने बताया कि क्यों गणेश चतुर्थी उनका सबसे पसंदीदा त्योहार है

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Saumya tandon
विघ्नों का अंत करने और नई शुरुआत करने वाले भगवान गणेश के जन्म का उत्सव पूरे भारतवर्ष में खूब धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन, गणेश उत्सव का जोश खासतौर से महाराष्ट्र में देखने को मिलता है। गणेश विसर्जन की सबसे लंबी कतारें मुंबई मंे होती हैं, जो 24 घंटे तक चलती है! गणेश चतुर्थी आने को है, उत्सव का माहौल बन गया है और इन सबके बीच उसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। अपने घरों और दिलों में बप्पा के स्वागत के बारे में -ज्ट के कुछ कलाकारों ने क्या कहा, आइए जानते हैं।
 सयाली संजीव उर्फ ‘परफेक्ट पति’ की विधिता
‘‘गणेश चतुर्थी हमेशा से ही मेरे लिये सबसे खास त्योहार रहा है। हम हमेशा शाडू माटी मूर्ति घर लेकर आते हैं, जोकि पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली है। मैं सजावट भी ईको-फ्रेंडली करती हूं, ताजे फूलों से नहीं, आर्टिफिशियल से, जोकि खूबसूरत भी होते हैं और उन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। मैं मंदिर को भी मिट्टी के दीयों से सजाती हूं, उसे एकदम साधारण रखती हूं। इस साल भी हम घर पर अपने परिवारवालों और दोस्तों के साथ पूजा कर रहे हैं। मेरी बस यही प्रार्थना है कि बप्पा मेरे परिवार की अच्छी सेहत बनाये रखे और मेरे नये शो ‘परफेक्ट पति’ को भरपूर कामयाबी मिले।’’
आयुष आनंद उर्फ ‘परफेक्ट पति’ के पुष्कर
‘‘मैं घर पर गणपति की ईको-फ्रेंडली मूर्ति लाने पर भरोसा करता हूं और यह गणेश चतुर्थी मनाने का सबसे अच्छा तरीका है। इस तरह हम अपनी परंपरा को निभाते हैं और साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ बनाये रखने में भी योगदान देते हैं। मेरी मां हमेशा दिल्ली से यह त्योहार मनाने आती हैं और मुंबई में हमारे घर में उनका स्वागत करती हैं। इस साल भी उससे अलग नहीं होने वाला। मैं गणेशजी के साथ अपनी मां का भी बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। जहां कुछ मांगने की बात है, यह मेरे और बप्पा के बीच की बात है…मैं इसे सबको नहीं बता सकता हूं। लेकिन, उन आशीर्वादों में से एक, अपने नये शो ‘परफेक्ट पति’ के बेहतर प्रदर्शन के लिये है।’’
सौम्या टंडन उर्फ ‘भाबीजी घर पर है’ की अनिता
‘‘सच कहूं तो गणेश चतुर्थी को लेकर मेरी मिली-जुली भावनाएं है। हमारे घर में गणेशजी की कई सारी प्रतिमाएं हैं लेकिन हम उन्हें विसर्जित नहीं करते। जहां तक मैं अपने धर्म और इतिहास को समझती हूं, गणेश का विसर्जन हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। इसे लोकमान्य तिलक ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शुरू किया था। ईको-फ्रेंडली मूर्ति के विचार को भी मैं सपोर्ट नहीं करती क्योंकि यह केवल दिखावटी प्रेम है। मैं मूर्तियों के विसर्जन के पूरी तरह खिलाफ हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि उनके विसर्जन से पानी प्रदूषित होता है, समुद्र तट गंदा होता है और समुद्री जीवन खत्म होता है। यह देखना अपमानजनक लगता है कि जिस मूर्ति की हम पूजा करते हैं और सम्मान करते हैं, वह तटों पर टूटी पड़ी रहती हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान जो यात्रा निकलती है वह बहुत ही शोरगुल वाला होता है, कुछ लोग शराब के नशे में होते हैं और सड़कों पर बदतमीजी करते हैं। जिस तरह का संगीत बजाया जाता है उसमें किसी तरह की धार्मिक भावना नजर नहीं आती, इससे ट्रैफिक बढ़ता है और सामान्य जीवन प्रभावित होता है। मेरा मानना है कि त्योहार शंाति और धार्मिक तरीके से मनाने के लिये होते हैं। इससे दूसरों को या फिर पर्यावरण को परेशानी होती है। यह समाज के बदलाव की निशानी नहीं है। त्योहार की पवित्रता को बनाये रखने के लिए, हम घर पर पूजा करते हैं। मैं घर को सजाती हूं और घर पर मिठाइयां बनाती हूं, इसी तरह से मुझे गणेश चतुर्थी मनाना पसंद है।’’
सचिन श्राॅफ उर्फ ‘परमावतार श्रीकृष्ण’ के नंद बाबा
‘‘मैं वास्तविक जीवन में थोड़ा धार्मिक किस्म का हूं और कुछ भी शुभ काम शुरू करने से पहले भगवान गणेश का आशीर्वाद लेता हूं। इसलिये, परिवार और दोस्तों के साथ मैं पिछले 10 सालों से गणेश उत्सव मनाता आ रहा हूं। यह त्योहार मेरे दिल के बेहद करीब है। सही मायने में वह ‘विघ्नहर्ता’ हैं, इसलिये मैं उनसे खुशियां, सौहार्द और अच्छी सेहत मांगता हूं। यदि मुझे समय मिला तो मैं कुछ पांडालों पर घूमने जाऊंगा, साथ ही उन दोस्तों के घर जाऊंगा, जिन्होंने अपने घर पर गणपतिजी को बिठाया है। मूर्तियों की बात करें तो मेरा मानना है कि ईको-फ्रेंडली मूर्तिंयां पर्यावरण के प्रति अपना योगदान देने में मदद करती हैं। जल जीवों या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये बिना मूर्ति का विसर्जन किया जा सकता है। मैं प्रार्थना करता हूं कि हर किसी के लिये गणेश चतुर्थी खुशहाली से भरपूर हो और मैं उम्मीद करता हूं कि सभी इस त्योहार को सुरक्षित तरीके से मनायें।’’
फरनाज़ शेट्टी उर्फ ‘सिद्धिविनायक’ की सिद्धि
‘‘मुझे लगता है कि गणेश चतुर्थी वाकई बहुत खूबसूरत और एक-दूसरे से मिलने-जुलने वाला त्योहार है, क्योंकि यह पूरे परिवार को कुछ समय के अलगाव के बाद एक साथ आने का मौका देता है। मैं हमेशा भगवान गणेशजी की पूजा करती हूं और मेरा मानना है कि मेरी लगातार कामयाबी के पीछे उन्हीं का हाथ है। जब मैं छोटी थी तो मुझे लगता था कि गणेशजी के कान में कोई इच्छा बोलने से वह जीवन में जरूर पूरी हो जाती है। टेलीविजन इंडस्ट्री में काम करने के दौरान, मुझे लगता है कि मेरी वह इच्छा पूरी हो गई, क्योंकि मैं -ज्ट के ‘सिद्धिविनायक’ में सिद्धि की भूमिका निभा रही हूं। भले ही इस बार काम के शेड्यूल की वजह से मैं घर पर गणपतिजी को इस बार नहीं बिठा पाऊंगी, लेकिन उम्मीद करती हूं कि अगले साल एक छोटे ईको-फ्रेंडली गणपति के साथ मैं ऐसा कर पाऊं। इस मौके पर, मैं लोगों से प्रार्थना करती हूं कि वह सुरक्षित और कम प्रदूषण करने वाला ईको-फ्रेंडली त्योहार मनायें।’’
शुभांगी अत्रे उर्फ ‘भाबीजी घर पर हैं’ की अंगूरी भाबी
‘‘मैं थोड़ी धार्मिक किस्म की इंसान हूं और मेरा हमेशा से ही यही मानना रहा है कि गणेश हमारे अंदर बसते हैं और हमेशा हमारे साथ होते हैं। इस त्योहार के 10 दिनों के दौरान, मैं अक्सर उपवास रखती हूं या गणेशजी से यह वादा करती हूं कि खुद को नकारात्मक आदतों से दूर रखूंगी। कई लोग गणेश विसर्जन की परंपरा पर यकीन करते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि इस त्योहार के उत्सव के कारण निश्चित रूप से पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से कई सारी प्राकृतिक आपदाएं आती हैं। ईको-फ्रेंडली गणेश की मूर्ति किसी ना किसी रूप में पर्यावरण के प्रदूषण को कम करने में मदद करती है और आगे आने वाली पीढ़ी को अलग और सकारात्मक संदेश देती है। मुझे जीवन में सही निर्णय लेने की सद्बुद्धि दी, मैं उम्मीद करती हूं कि गणेशजी अपने भक्तों को ढेर सारी खुशियां और अच्छी सेहत दे।’’
रोहिताश गौड़ उर्फ ‘भाबीजीघर पर हैं’ के तिवारीजी
‘‘चंडीगढ़ के कालका से मंुबई आने के बाद मुझे गणेश चतुर्थी का महत्व और उसकी भव्यता का अहसास हुआ। मैंने शादी के बाद अपने परिवार के साथ डेढ़ दिन के उत्सव से इस त्योहार को मनाने की शुरुआत की लेकिन सामान्य गणेश प्रतिमा की वजह से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए, हमने इस त्योहार को ईको-फ्रेंडली तरीके से मनाने का फैसला किया। पिछले 2 साल से हम 5 दिनों के लिये ईको-फ्रेंडली त्योहार मना रहे हैं। इस दौरान हम लगातार वीडियो के माध्यम से लोगों को ऐसा करने का आग्रह करते आ रहे हैं। हर साल की तरह हम इस मौके पर अपने घर पर गणेशजी का स्वागत कर रहे हैं। मैं प्रार्थना करता हूं कि खुशियां फैलाते हुए ‘भाबीजी घर पर हैं’ शो, इसी तरह सफलता की सीढ़ियां चढ़ता रहे।’’
हिमांशु मल्होत्रा उर्फ ‘परमावतार श्रीकृष्ण’ के भगवान विष्णु
‘‘गणेश चतुर्थी एक ऐसा त्योहार है जिसे हम पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं, खासतौर से हम मुंबईवाले क्योंकि हमारे दिलों में इसकी एक खास जगह है। हम पिछले 7 सालों से गणपति बप्पा को घर ला रहे हैं और यह त्योहार मना रहे हैं। मेरा मानना है कि हमें वही मिले जिसके हम योग्य हैं इसलिये इस गणेश चतुर्थी मैं सिर्फ बप्पा से इतना कहूंगा कि मुझ पर और मेरे पूरे परिवार पर अपना प्यार और आशीर्वाद बरसायें। वैसे, मुझे लगता है कि यह त्योहार बहुत ही व्यवसायिक हो गया है और कुछ नया करना चाहता हूं और इसको सही अर्थ देना चाहता हूं। इसलिये, जब मुझे ईको-फ्रेंडली उत्सव मनाने के बारे में पता चला तो मैंने गणेश चतुर्थी मनाना शुरू किया और ईको-फ्रेंडली गणेश घर लेकर आया। मैंने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी ऐसा करने को कहा। इसके अलावा, जैसा कि ईको-फ्रेंडली का यह काॅन्सेप्ट कहता है, तो अपने घर ईको-फ्रेंडली मूर्ति लेकर आयें। हम पर्यावरण को बचाने और पानी का प्रदूषण कम करने के लिये एक कदम आगे बढ़ायेंगे। इसलिये, मैं सबसे यह निवेदन करता हूं कि ईको-फ्रेंडली काॅन्सेप्ट के बारे में सोचें और अपने पर्यावरण को बचाने की दिशा में कदम बढ़ायें।’’

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