किरदार निभाना एक बड़ी जिम्मेदारी : Laksh

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Laksh Lalwani as Porus

सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के आगामी शो ‘पोरस’ में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं लक्ष्य
लालवानी। उनसे बातचीत के मुख्य अंश

इस शो का हिस्सा बनने से पहले आपको पोरस के बारे में कितनी जानकारी थी?
पोरस के बारे में मेरी जानकारी किताबों तक सीमित थी। जो भी किताबें मैंने पढ़ी, उसमें
जितना लिखा था, उतना ही मुझे पता था। मुझे यह तो पता था कि उन्होंने एलेक्जेंडर के साथ
ऐतिहासिक युद्ध लड़ा था, लेकिन जब इस शो पर काम शुरू किया तब मुझे भारत के महान
संरक्षक पोरस के बारे में ज्यादा जानकारी मिली।

आपने इस चरित्र के बारे में कितनी पढ़ाई की?
मैंने उनके बारे में काफी रिसर्च किया। खासकर पोरस के व्यक्तित्व और 350 ईसा पूर्व की
स्थिति कैसी थी, यह जानने की कोशिश की। आखिर यह शो उसी काल का जो है। लेकिन
जितनी जानकारी चाहता था, उतनी मिली नहीं। मैं सिद्धार्थ (कुमार तिवारी) सर और पूरी टीम
का आभार प्रकट करना चाहूंगा जिन्होंने मुझे ऐतिहासिक युद्ध और पोरस के बारे में जानकारी
दी। स्क्रिप्ट भी अच्छे-से लिखी गई है और यह न केवल इतिहास समझने में बल्कि अधिकार के
साथ परफॉर्म करने में भी मदद करती है।

क्या आपने इस चरित्र को निभाने के लिए किसी तरह की खास ट्रेनिंग ली?
हां, शुरू ही जिम ट्रेनिंग के साथ हुआ। वर्क आउट के जरिये मुझे इस महत्वपूर्ण किरदार का शेप
हासिल करना था। ईमानदारी से कहूं तो मेरा शेप पहले सही नहीं था। इस वजह से मुझे यह
प्रोजेक्ट हासिल करने के बाद बॉडी शेप पर करीब पांच महीने काम करना पड़ा। एक एक्टर के
लिए अच्छा दिखना उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कैरेक्टर के अनुरूप दिखाई देना। चूंकि, मैं
बचपन से ही मार्शल आर्ट कर रहा हूँ, उसका भी एक्शन सीन में मुझे मिला। मुझे हॉर्स राइडिंग
सीखनी पड़ी और यह अनुभव एक नया एडवेंचर था। साथ ही शो के लिए मैंने तलवार से लड़ना
सीखा। मुझे मेरी आवाज पर काम करना पड़ा ताकि डायलॉग डिलीवरी बेहतर हो सके। शो की
शूटिंग शुरू होने से छह-सात महीने पहले ही मेरी तैयारी शुरू हो गई थी।

कृपया हमें इस शो के स्केल के बारे में कुछ बताइये?
प्रोडक्शन वैल्यू काफी ज्यादा है। गुजरात के उम्बरगांव में सेट ही 9 एकड़ में फैला है। सेट इस
तरह बना है कि आपको लगेगा कि हम वास्तविक लोकेशंस पर शूट कर रहे हैं। जहां भी जरूरत
हो, हमने वास्तविक लोकेशंस पर शूट किया है। हमने खाओसोक, थाईलैंड में भी शो की शूटिंग
की है।

पोरस में बहुत-से चरित्र हैं और प्रत्येक कैरेक्टर शो में वैल्यू-एड करता है। सेट पर आप सबसे
कैसे घुले-मिले?
इस तरह की बेहतरीन टीम के साथ काम करना खूब मजेदार था। हम साथ में खाना खाते थे,
वर्कआउट करते थे। हमने शो में बेस्ट परफॉर्म करने के लिए एक-दूसरे की मदद की है। जब
दर्शकों की प्रतिक्रिया आएगी तब ही पता चलेगा कि हमारा प्रदर्शन कैसा था। भले ही, स्क्रीन पर
मैं एलेक्जेंडर से संघर्ष करता नजर आउंगा, ऑफ स्क्रीन रोहित पुरोहित मेरा बहुत अच्छा दोस्त
है।

किस वजह से आपने यह शो स्वीकार किया?
इस एक चरित्र में बहुत सारे रंग समाए हैं। इसके अलावा, बहुत से लोगों को भारत के महानतम
संरक्षक की जानकारी नहीं है। यह उनके लिए भी एक मौका है कि वे इस महान योद्धा के बारे में
जान सके। यह भूमिका मेरे लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मैं खुद को पोरस के चरित्र से काफी
हद तक करीब समझता हूँ। उनकी देशभक्ति और अपने परिवार व प्रियजनों को आहत नहीं होने
देने का गुण, प्रेरणादायक है। मैं भी अपने प्रियजनों के प्रति बेहद भावुक हूँ। उनकी रक्षा करने की
बात ही मन रहती है। जिस तरह पोरस का संबंध अपनी माँ से है, वैसा ही बंधन मैं भी अपनी
माँ के साथ साझा करता हूं। पोरस बहुत शांत है और संयमित व्यक्ति हैं। मैं एक ऐसा व्यक्ति बन
गया हूँ जो अपने विचारों पर अधिक मुखर है।

आप फ्री समय में क्या करते हैं?
मैं फिल्मों का दीवाना हूँ। फ्री समय में मैं फिल्में देखना पसंद करता हूँ।

हमें अपने परिवार के बारे में कुछ बताइये?
मेरे पिताजी सेल्स में हैं और माँ एक फैशन डिजाइनर हैं। उनका खुद का एक बुटीक भी है।
बचपन से ही मुझे टीवी और फिल्म देखना अच्छा लगता रहा है। इसी वजह से मेरे अंदर एक
अभिनेता बनने की इच्छा पली-बढ़ी। और तो और मेरी माँ कहती है कि मेरे अंदर फैशन सेंस भी
है।

पोरस भारतीय टीवी का सबसे बड़ा शो है तो क्या आप इसे लेकर उत्साहित या नर्वस हैं?
मैं इस समय नर्वसनेस, डर और रोमांच की मिश्रित भावना महसूस कर रहा हूँ। यह एक बड़ी
जिम्मेदारी है। लोग अब सिर्फ पोरस को जानते हैं और लक्ष्य के बारे में नहीं। नर्वसनेस के बिना
मैं 100 प्रतिशत प्रदर्शन नहीं कर सकता इसलिए मुझे लगता है कि नर्वस होना अच्छा है।

आप इंडस्ट्री के न्यूकमर्स को क्या सुझाव देना चाहेंगे?
जब कोई बाहर से आता है तो वह रोमांचित होता है और उसकी आंखों में सपने होते हैं। लोग
मुंबई उम्मीदों के साथ आते हैं। लेकिन जब सच्चाई से उनका सामना होता है तो उनके अंदर की
आग बूझने लगती है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि उन्हें अपने अंदर की आग को जलाए रखना
चाहिए। उसे जारी रखना होगा। हर एक को अपना मौका मिलता है। समय आएगा, उसका
इंतजार करें।

आपका रोल मॉडल कौन है?
मेरे रोल मॉडल अमिताभ बच्चन है।

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