दादाजी का जीवन पर बड़ा प्रभाव : सौरभ गोयल

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Saurabh

सौरभ गोयल का जन्म किच्चा शहर में हुआ है। उनकी स्कूली शिक्षा मुख्य रूप से जेसी पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर से हुई। उनका बचपन भारत के किसी भी अन्य बच्चे के जैसा ही था। हिंदी फिल्म देखना, क्रिकेट के साथ ही कबड्डी और गिल्ली डंडा जैसे ग्रामीण खेल उनका पसंदीदा खेल था। सौरभ इंजीनियरिंग के अपने दूसरे वर्ष में थे, जब उन्होंन अभिनय के प्रति अपने जुनून को महसूस किया। वह स्कूल और कॉलेज के नाटक में सक्रिय रूप से भाग लेते थे। वह कहते है अभिनय मुझे जीवंत और खुशनुमा महसूस कराता है। उन्होंने दिल्ली आ कर बैरी जॉन के साथ थियेटर वर्कशॉप किए। इसके अलावा, उन्होंने लुशिन दुबे, रवणीत क्लेर के साथ थियेटर वर्कशॉप किए। कॉलेज खत्म करने और नौकरी मिलने के बाद, उन्होंने आखिरकार अपने परिवार को इस बात के लिए मनाया कि उन्हें अपने सपने को सच करने के लिए मुंबई जाने दिया जाए।
फिल्म उद्योग में उनके संघर्ष के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, शुरुआत में यह बहुत आसान नहीं था क्योंकि मैं बॉम्बे ‘द सिटी ऑफ ड्रीम्स’ के लिए अजनबी था। मुझे कुछ पता नहीं था। एक अंतर्मुखी व्यक्ति होना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। मैं लोगों से बात करने और काम के लिए संपर्क करने में संकोच करता था। मैंने किसी भी तरह से इन चुनौतियों का सामना किया और लोगों से मुलाकात करनी शुरू की। एक वक्त ऐसा आया, जब कुछ भी होता नहीं दिख रहा था। तब मैंने घर वापस जाने के बारे में सोचा। फिर भी मेरे दिल में एक अभिनेता बनने की इच्छा कहीं न कहीं दबी ही रही। 6 महीने बाद बॉम्बे वापस लौटा और बहुत मेहनत की। जैसा कि किसी ने सही कहा है कि कड़ी मेहनत का परिणाम हमेशा सुखद होता है। मुझे अच्छा काम मिलना शुरू हो गया।
सौरभ ने सोनी टीवी पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक परवारिश के साथ शुरुआत की। फिर स्टार प्लस के लिए एवरेस्ट में एक सहायक भूमिका निभाई। इसके बाद, एपिक चैनल के धर्मक्षेत्र में अश्वत्थामा जैसे मुख्य चरित्र को निभाया और क्राइम पेट्रोल के कई एपिसोड में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने लगभग 30 लघु फिल्में की हैं। अल्टबालाजी की वेब सीरीज ‘द टेस्ट केस’ में उनके चरित्र विष्णु सोरेन की काफी सराहना हुई।
सौरभ के लिए ये एक रोलर कोस्टर की सवारी रही है, जहां पहले उन्हें काम नहीं मिला और बाद में उन्हें इंडस्ट्री में सर्वश्रेष्ठ के साथ काम करने का मौका मिल रहा है। सौरभ के पास एक और शानदार प्रोजेक्ट है। वे फिलहाल नागेश कुकुनूर द्वारा निर्देशित एक वेब सीरिज पर काम कर रहे हैं। इसका नाम है, ‘द सिटी ऑफ ड्रीम्स’ जो अपलॉज एंटरटेनमेंट के लिए बनाया जा रहा है। सौरभ के पास गौरव मेहरा द्वारा निर्देशित एक स्वतंत्र फीचर फिल्म भी है, जिन्होंने बहुप्रशंसित लघु फिल्म सील निर्देशित की है।
अंत में सौरभ कहते हैं, ‘मेरे दादाजी का मेरे जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने मुझे विनम्र, ईमानदार, समय का पाबन्द बनाया, सच्चाई और जीवन की अन्य नैतिकता सिखाई, जिसकी वजह से मैं वह बन सका, जो आज मैं हूं।’

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