साफ-सफाई और अनुशासन को लेकर थोड़ी सख्ता हूं : अनिता कुलकर्णी

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जी हाँ सोनी सब टीवी के शो मंगलम दंग्लम में चारुलता कुट्टी का किरदार निभा रही अदाकारा अनीता कुलकर्णी से सेट्स पर शो को लेकर  हुई बातचीत का ब्यौरा प्रस्तुत है …..

इस शो में अपने किरदार के बारे में हमें बतायें।

चारूलता कुट्टी का मेरा किरदार एक बेहद सख्‍त प्रोफेसर का हैजिसका मिजाज घर पर भी वैसा ही है। हालांकि, वह एक साधारण महिला है और अपने जीवन में बेहद अनुशासित है। उसने अपने बच्‍चों को भी वैसे ही बड़ा किया है।

इस शो को हां कहने की क्‍या वजह रही?

काफी समय बाद मुझे कॉमेडी करने का मौका मिला है। जब मैंने इस किरदार के लिये ऑडिशन दिया थामुझे यह बहुत पसंद आया था क्‍योंकि यह आम डेली सोप और सास बहू ड्रामे से अलग है। इसकी दूसरी वजह यह थी कि इसका शूटिंग लोकेशन मेरे घर के काफी करीब है।

 ‘मंगलम् दंगलम्’ को कौन-सी चीजें टेलीविजन के बाकी शोज़ से अलग बनाती हैं?

मंगलम् दंगलम्’ ससुर और जमाई के बीच हल्‍की नोंकझोंक का शो है। यह शो बेहद प्रोटेक्टिव पिता के बारे में हैजो नहीं चाहता कि उसकी बेटी शादी करे। मुझे लगता है कि यही इस शो का सबसे अच्‍छा पार्ट है क्‍योंकि यह उस आम सोच के उलट है कि हर लड़की को शादी करनी चाहिये और खुशी-खुशी घर बसा लेना चाहियेऐसा बहुत कम मामलो में होता है। इस शो में पिता उस लड़के को पूरी तरह परख लेना चाहता है जोकि उसकी बेटी से शादी करना चाहता हैयह इस ससुर की सबसे बड़ी खूबी है।

आपको क्‍या लगता है एक बहू के आदर्श गुण क्‍या होने चाहिये?

मुझे नहीं लगता कि कोई एक खास गुण होना जरूरी होता है। हर किसी को वैसा होना चाहिये जिस तरह वह रहना चाहते है। क्‍यों हमेशा एक बहू को ही खुद को बदलना चाहिये और उस परिवार के लिये त्‍याग करने चाहियेजोकि उसके लिये वैसा नहीं करेगा! यदि कोई परिवार उसका आधा भी कर ले जितना कि लड़की करती है तो मुझे लगता है कि इस देश में हर परिवार खुशहाल होगा।

हमें पता चला है कि आपने इसकी शूटिंग शुरू कर दी है। तो फिर अलग-अलग उम्र के कलाकारों के साथ काम करके कैसा लगा और अब तक का आपका अनुभव कैसा रहा?

हां यहां का परिवार मुझे पसंद है और हम आपस में काफी अच्‍छी तरह घुल-मिल गये हैं। हम लोग इतने करीब आ गये हैं कि ऐसा लगता ही नहीं एक शो के लिये हम एक साथ हैं।

क्‍या आप इस शो के अपने किरदार ‘चारूलता’ के साथ खुद को जोड़कर देख पाती हैं?

हांकुछ मायनों में कर पाती हूं। मैं साफ-सफाई और अनुशासन को लेकर थोड़ी सख्‍त हूं। मुझे यह भी लगता है कि जीवन में कुछ चीजें सिलसिलेवार होनी चाहियेताकि हमारी आधी से ज्‍यादा चिंता खत्‍म हो जाये। आमतौर पर परिवारों मेंकेवल एक व्‍यक्ति काम करता रहता है और सारे लोग उस एक अकेले इंसान पर काम का सारा बोझ डाल देते हैं। इसलियेमुझे लगता है कि यदि अनुशासन हर किसी के जीवन का हिस्‍सा हो तो एक महिला- एक मांएक पत्‍नी या बहू के ऊपर कम बोझ पड़ेगा और वह अपने लिये थोड़ा समय निकाल पायेगी। अपने व्‍यक्तिगत जीवन में भी मैं इस बात का ध्‍यान रखती हूं कि मेरे पति और मेरा बेटा अपने अनुसार चीजों को व्‍यवस्थित रखें।

अपने ऑनस्‍क्रीन बेटे करणवीर के साथ आपका तालमेल कैसा है?

वह कम बोलते हैं और जब हम मिले थे तो वह काफी अच्‍छे और सौम्‍य लगे। हालांकिशूटिंग अभी शुरू ही हुई हैलेकिन मुझे पूरी उम्‍मीद है कि आगे जाकर हमारा तालमेल काफी अच्‍छा होगा।

आपको क्‍या लगता है, जब अपना जीवनसाथी चुनने की बात आती है तो आज की पीढ़ी के लिये उनके पेरेंट्स की राय कितनी मायने रखती है?

मैं सचमुच इसके बारे में नहीं जानती। मेरा बेटा अब तक उस उम्र में नहीं पहुंचा हैमैं इस बारे में नहीं बता सकती। मैं वाकई किसी और के बारे में भी नहीं बता सकती।

मैं बस एक ही मैसेज देना चाहूंगीजिस तरह से एक बहू ससुरालवालों और परिवार के लिये त्‍याग करती हैउसी तरह उसे उसी रूप में स्‍वीकार करेंजैसी वह है। साथ ही उसे भी समझें।

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