सोशल मीडिया बड़ा डेमोक्रेटिक स्पेस : Renuka Shahane

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Renuka shahane

Renuka Shahane

सुरभि, सर्कस जैसे टीवी सीरियलों में अपनी प्यारी मुस्कान बिखेर चुकीं तथा
‘हम आपके हैं कौन’ फिल्म में अपना दमखम दिखा चुकी Renuka Shahane एक बार
फिर टीवी शो ‘खिचड़ी’ पर दमदार वापसी कर रही हैं। शहाणे ने मराठी मूवी
‘रीता’ भी डायरेक्ट की हैं। लेकिन इस बार डॉन का किरदार निभाती नजर
आएंगी। हमने उनसे इस बारे काफी लंबी बातचीत की। पेश है उनकी टीवी
वापसी पर वे कैसा महसूस कर रही हैं और उनके किरदार के बारे में :-

टीवी से आपका पुराना नाता है, टीवी पर आपने कई शोज किये हैं। टीवी को
लेकर आपकी सोच कितनी बदली है, जब आपने शुरू किया था, तब से अब में?
अभी तो काफी अंतर है ही, क्योंकि जब मैं काम करती थी रेग्युलरली डेली हुआ
करती थी साप्ताहिक। अब तो फॉर्मेट बदल चुका है तो डिमांड भी अलग होती है।
जिस तरह से काम किया जाता है वो भी अलग होता है। तो डेफिनेटली बहुत
ज्यादा फर्क है। हमारी वैसे सीमित रहती थी धारावाहिक, क्योंकि जब भी
बताया जाता था, जैसे शुरुआत, मध्य, अंत सबकुछ हमको पता रहता था पहले।
और बहुत ज्यादा उसमें अति नहीं थी। अब शुरुआत का जरूर पता रहता है, पर
उसमें बाद में क्या हो जायेगा या स्टोरी कैसे आगे ली जायेगी या कितने साल
चलेगी, ये क्योंकि हम पहले से तय नहीं कर सकते, उस हिसाब से ओपन रहता
है, ये बदलाव आया है। कैरेक्टर का चुनाव करते समय भी ये ध्यान रखना पड़ता
है कि कुछ सालों के बाद भी बंद हो सकता है या 6 महीने में भी बंद हो सकता
है।

लेकिन आपने वैसे सीरियल्स से हमेशा दूरी बनाये रखी?
ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे कोई परहेज नहीं है टेलीविजन से। यही बात कि
मेरी शादी हो गई, उसके बाद बच्चे हो गये, और मेरी इच्छा थी कि मैं ज्यादा
ध्यान उन पर दूं, इसलिये मैं ज्यादा काम नहीं ले पा रही थी। और आज भी
इतनी नहीं ले पाती हूं क्योंकि मेरी बड़ी बेटी की 10वीं है इस साल तो मुझे
सबसे ज्यादा ध्यान उन पर ही देना पड़ता है। तो बस यही बात थी, जिसकी
वजह से मैं दूर रह चुकी हूं। क्योंकि टेलीविजन जब आप कर रहे हो, और मैं बहुत
प्रोफेशनल थी, आज भी हूं तो मैं दो स्टूलों पर खड़ी रहकर कुछ नहीं कर सकती
थी। या तो मैं इस पार या तो उस पार, उस तरह का काम करती हूं। तो उस तरह
के काम में फिर आप कहीं ना कहीं ध्यान नहीं दे पाते बच्चों पर। इसलिये वो
चुनाव था मेरा कि मैं कहीं बैकसीट ले लूं, थोड़े साल, और एक्टिंग आप ताउम्र
कर सकते हो। तो एक बार बच्चे थोड़े ज्यादा इंडिपेंडेंट हो जायें, तो लगातार
करूंगी और ज्यादा दिखूंगी।

‘खिचड़ी’ में क्या खिचड़ी पाने की तैयारी है?
बहुत अच्छी स्वादिष्ट खिचड़ी है। मैं वैसे भी बहुत बड़ी फैन रह चुकी हूं उस
सीरियल की, उसके किरदारों की, सभी अभिनेता और अभिनेत्रियां बहुत
शानदार हैं, और उनके जो मेकर हैं, हैट्स ऑफ प्रोडक्शन, आतिश और जेडी, मेरे
बहुत पुराने और अच्छे मित्र हैं। लेकिन कभी मौका नहीं मिला उनके साथ काम
करने का, और जब उन्होंने कहा कि ‘खिचड़ी’ में कैमियो है, करोगी क्या क्योंकि
तुम कुछ लॉन्ग रनिंग नहीं ले रही हो, तो उन्होंने सोचा कि छोटा-सा किरदार
मुझसे करवायें। मैंने तो झट से हां कह दी, मैंने कहा अच्छी बात है कि मैं कहीं ना
कहीं जुड़ी रहूं , अपने प्रोफेशन के साथ। और इन लोगों के साथ काम करने का
मौका मिल रहा है मुझे, सो इट इज वेरी वंडरफुल। वो किरदार भी बड़ा मस्त है,
ऐसा कि जो मैंने पहले कभी किया नहीं है परफॉर्म। कॉमेडी भी मैंने कम ही की
है, तो एक अच्छा मौका रहा मेरे लिये उस तरह से, अलग कुछ करने का, चुनौती
रही।

इसमें लेडी डॉन शायद आप प्ले कर रही हैं?
हां जी डॉन हूं मैं, पर उससे ज्यादा बता दूं तो शायद एपिसोड का मजा चला
जायेगा। महाराष्ट्रियन लेडी डॉन हूं मैं, इतना तो मैं कह सकती हूं।

फिल्मों मे लेडी डॉन बहुत कम हुई हैं, एक शबाना जी हुई हैं, एक ‘फुकरे’ में रिचा
चड्ढा जी आई हैं, और अब आप। लेडी डॉन की मुश्किलें क्या होती हैं। जैसे सपना
दीदी पर एक फिल्म बन रही है जिसमें दीपिका आ रही हैं। महिलाओं का ऐसे
क्षेत्र में वर्चस्व को आप किस तरह से देखती हैं?
मुझे लगता है जो भी महिलाएं आती हैं इस क्षेत्र में, वो क्योंकि उनके फादर या
कोई जुड़े होते हैं अंडरवर्ल्ड में, तो ऐसे मजबूरी या फिर कोई इन्सटेंस ऐसा होता
है उनकी जिंदगी में, जिसकी वजह से उनको बनना पड़ता है। बिकॉज, एक
चुनाव के तौर पर मुझे नहीं लगता कोई महिला करना चाहेगी, क्योंकि उसकी
जो थ्रिल है वो बात अलग है, लेकिन उनको डिफिकल्टीज भी बहुत झेलनी पड़ती
है, स्पेशियली अगर महिलाओं की फैमिली और बच्चे हों। उस समय हम हजार
बार सोचते हैं कि बच्चों को सुरक्षित रखना, क्योंकि वो प्रोफेशन मे सुरक्षा तो

बिलकुल भी नहीं होती। इसलिये शायद महिलाएं बहुत कम आती हैं इस
प्रोफेशन में।

आपके महाराष्ट्रीयन लेडी डॉन का बहुत अच्छा लुक आया है। इस रोल के लिये
आपकी क्या खास प्रिपरेशन रही? या कुछ चेंज हमें देखने मिलेगा?
चेंज तो डेफिनेटली देखने को मिलेगा, बड़ा ही मजेदार चेंज है, ऐसे पहले कभी
दिखी नहीं हूं मैं। एक सीन में जैसी दिखती हूं वैसी बहू हूं, ऐसे दोनों लुक्स देखने
को मिलेंगे लोगों को। और दूसरी बात ये भी है कि, मैंने अपने आपको और इस
किरदार को, जैसे आतिश काम करते हैं, वो बहुत बारीकी से अपने कैरेक्टर्स के
बारे में सोचते हैं, तो ड्रेस से लेकर सबकुछ, सारी डिटेल्स में ध्यान दिया है
उन्होंने, सब फीडबैक भी इनकॉरपोरेट करते हैं स्टार प्लस से जो मिलता है। और
मैं तो बिलकुल डायरेक्टर की एक्ट्रेस हूं, मैं कभी अपने विचार थोपती नहीं हूं,
क्योंकि मुझे लगता है, डायरेक्टर को अपने किरदारों से जो भी चाहिये और
कहानी से जो भी अपेक्षित है, वो सबसे ज्यादा डायरेक्टर को पता होता है। जब
आतिश ने मुझे बताया कि मेरे दिमाग में किरदार ऐसा है तो मैंने भी खुद को
जैसा वो चाहते हैं वैसे ऐक्ट किया, इवन लुक भी वैसे भी, 2-3 लुक टेस्ट ट्राय
आउट करके फाइनल कर लिया।

एक लेडी डॉन कितनी गुस्सैल होगी, कुछ गाली-गलौज वगैरह?
गुस्से का तो पता नहीं पर मजेदार डॉन की तो सिम्पैथी मिल ही जायेगी!

लेडी डॉन की किस कैरेक्टर ने आपको बहुत इम्प्रेस किया?
मेरी ऑल टाइम फेवरेट रही हैं सुप्रिया पाठक जी, मुझे हंसा का किरदार पहले से
बहुत अच्छा लगता है। ‘खिचड़ी’ का केस एक इनसेंबल केस है, सारे किरदार
बहुत ही फनी हैं, एक किरदार ऐसा नहीं है जो हावी हो जाये। मेरी इंटरेक्शन
राजीव मेहता, जेडी और अनंग जी के साथ भी है कैरेक्टर में। अनंग जी के साथ
मैंने ‘इंतहा’ के बाद काफी समय के बाद काम किया है। मुझे बहुत ही मजा आया।

‘खिचड़ी’ जब आया था तो काफी समय चला था और सबका चहेता था, पर तब
से अब तक कॉमेडी शोज की भरमार हो गयी है। आप उनमें कॉमेडी की क्वालिटी
को कितना देखती हैं, कॉमेडी सम्भालने की कितनी जरूरत महसूस होती है?
सम्भालने की बहुत जरूरत महसूस होती है, आजकल वॉट्सअप से लेकर हर
जगह कॉमेडी मिलती है। उसमें जो फ्रेशनेस मेंटेन करना बहुत बड़ी बात है, जो

निर्माता और निर्देशक हैं और एक्टर्स हैं, उन सब पर बहुत जिम्मेदारी आ जाती
है, फ्रेशनेस मेंटेन करने के लिये। हमारे शो के लिये एक लकी चीज है, एक लॉयल
ऑडियंस है। आज भी, इन्क्लूडिंग मी, एक लॉयल ऑडियंस है जो ‘खिचड़ी’ और
‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ जैसे शोज देखना चाहेंगे भले ही वो कितने भी पुराने
एपिसोड्स हों। स्पर मेंटेन करना भी एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है ही, और कुछ
नया दिखाना हर बार। इस मामले में आतिश बहुत टैलेंटेड हैं, जमीन से जुड़े हुए
आदमी हैं, कंटेम्पररी रहते हैं। वो भूतकाल से बंधा हुआ नहीं है, वो आज की
स्थिति को निरीक्षण करके अपने किरदारों और कहानियों में पिरोता है। ‘खिचड़ी’
में वो फ्रेशनेस नजर आयेगी, उसके कैरेक्टर्स भी मासूम हैं। जब मासूम लोग
जिनके जरिये हंसते-हंसते कुछ सीखने मिले, फिर मजा भी आता है।

फिल्मों में मैंने आपको कभी नेगेटिव कैरेक्टर में नहीं देखा है, उसकी क्या वजह
रही है?
ऐसी बात नहीं है, मैं भी निभाना चाहूंगी नेगेटिव रोल। पर जीवन में ऑलरेडी
इतनी नेगेटिविटी है, मैं अभिनेत्री के पहले एक मां हूं, मेरे काम का इम्पैक्ट मेरे
बच्चों पर क्या होगा ये सोचने वाली बात होती है। मैं कोई भी ऐसा काम नहीं
लेना चाहती जिसका बुरा इम्पैक्ट बच्चों पर हो। दूसरी बात ये भी है कि मुझे ऐसा
लगता है जिस किरदार में वॉयलेंस हो या बहुत ज्यादा नेगेटिविटी हो, उसे हमें
प्रोत्साहन नहीं देना चाहिये, स्पेशियली बड़े या छोटे परदे पर, जहां इतन बड़ा
इम्पैक्ट आता है।
बच्चों का रिएक्शन क्या होता है, आपकी ‘हम आपके हैं कौन’ या ‘सुरभि’ इस
तरीके की फिल्में दिखाती हैं, बहुत ही स्ट्रॉन्ग रोल्स हैं आपके। उनका क्या कहना
है?
बच्चों को मेरा काम नहीं पसंद आता। उन्हें ऐसा लगता है मैं उनके साथ ही रहूं
घर पर। ‘हम आपके हैं कौन’ उन्होंने पूरी देखी, लेकिन उन्हें बुरा लगा कि मम्मी
को मार डाला। पर उन्हें मेरा लाइट हार्टेड, फैमिली ओरियंटेड शो अच्छा लगा
था। ‘कभी ऐसे गीत गाया करो’। इसलिये आई एम श्योर बच्चे ‘खिचड़ी’ भी पसंद
करेंगे, क्योंकि उन्हें मेरी डबिंग भी पसंद आई थी।

आशुतोष जी तो खलनायक बनते हैं अपने किरदारों में?
उनके काम कभी दिखा नहीं पाई बच्चों को क्योंकि सारे एडल्ट हैं।

आप दोनों की हिन्दी इतनी अच्छी है, तो आपके बच्चे भी अच्छी हिन्दी बोल पाते
हैं?
बोलते हैं, हालांकि दोस्तों में वो बड़े शब्द नहीं बोलते, लेकिन उन्हें अच्छी हिन्दी
की पूरी समझ है। बल्कि उन्हें अच्छी मराठी भी आती है और मां की वजह से।
हालांकि उनकी भाषा एकदम निश्रित नहीं है, क्योंकि आजकल बम्बई में इंग्लिश,
हिन्दी, मराठी, गुजराती, सबका मिश्रण देखा जाता है। लेकिन वो अच्छी भाषा
का उपयोग कर सकते हैं।

‘सुरभि’ जैसे शो की जरूरत कैसे महसूस करती हैं आप आजकल के दौर में। जैसे
टेक्नोलॉजी आ गई है, आपको ऐसा लगता है कि ऐसे शो फिर से बनने चाहिये?
बिलकुल बनने चाहिये, और ऐसे शोज को सब्सिडाइज करना चाहिये। जरूरी
नहीं है कि आमतौर पर ऐसे शो को वैसी ही ऑडियंस मिले। सीरियल्स की
कहानियों में कई बार ऐसे शोज टीआरपी नहीं ला पाते। लेकिन आज के दौर में
सारे चैनल्स हैं, जैसे फूड, ट्रेवल, एंटरटेनमेन्ट, पर ‘सुरभि’ में वो एकत्रित करके
कैप्शंस में दिखाया जाता था, जोकि बड़ा रोचक होता था, इन्फॉर्मेटिव था। एक
ही जगह जहां सब देखने को मिले, वैसा शो मैं मिस करती हूं अपने बच्चों के लिये।
वैसा कोई कार्यक्रम मिल जाये भारतीय कला संस्कृति के बारे में तो बहुत अच्छा
रहेगा। लेकिन ‘सुरभि’ को रिप्लेस करना बहुत मुश्किल है, सिद्धार्थ जी ने भी
कोशिश की थी।

आपने शाहरुख के साथ काम किया था ‘सर्कस’ में जब शाहरुख सुपरस्टार नहीं
होते थे, उन सीरियल की यादें कभी देखती हैं आप, क्योंकि आप दोनों को 25
साल हो गये हैं इंडस्ट्री में?
बहुत अच्छी यादें हैं। शाहरुख एक्चुअली स्टार हो चुके थे ऑलरेडी, ‘फौजी’ की
वजह से। हम जहां शूट करते थे रत्नागिनी, सतारा सांगली, तभी भी 10-12
हजार लोग इकट्ठा होते थे उन्हें देखने के लिये। उनका करिश्मा पहले से ही बहुत
ज्यादा था, लोगों पर उनका प्रभाव बहुत अच्छा रहा है पहले से ही। तभी हमारे
साथ मजेदार चीजें होती थीं सेट पर, हम हमारे अर्ली 20 में थे, उस टाइम भी
उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता था। उनकी जो एनर्जी है, और वो हमेशा
डायरेक्टर्स की एक्सपेक्टेशंस पर खरे उतरते थे। 72 ऑवर्स वो काम करते थे
विदआउट एनी कम्प्लेन। उनका बर्ताव, स्पॉट बॉय से लेकर प्रोड्यूसर तक, सबके
साथ एक जैसा था, सबके साथ बहुत अच्छे से पेश आते थे। उनकी यही बहुत
अच्छी क्वालिटीज थीं। ऐसे स्टार इंडस्ट्री में थे नहीं, और उन्होंने इंडस्ट्री में मार्क
बनाया अपना, फ्रेंडशिप को महत्व देने वाले।

‘सर्कस’ शो की कुछ ऐसी यादें जो आप कभी भूल नहीं सकतीं?
जानवर की बात आपने की तो, रीछ के साथ हमें शूटिंग करनी थी, अब तो
जानवर दिखाते ही नहीं हैं, क्योंकि वो बैन हो गये हैं। लेकिन हमने हाथियों,
घोड़ों के साथ शूट किया। मेरा पैरट्स का एक्ट था, जोकि काफी सीधा-सादा था।
लेकिन जिन्होंने काम किया, उनसे पता चला कि जानवरों की शक्ति क्या होती
है, कितने विशाल होते हैं ये। गलती से ऊंच-नीच हो जाये हो जाये तो एक डेंजर
का भी एहसास होता था। रीछ मोटरसाइकिल चला रहा था जोकि उसको बांधा
गया था, हम वो नये रीछ आने की खुशी सेलिब्रेट कर रहे थे। अचानक रीछ की
मोटरसाइकिल फास्ट हो गई तो पता चला हम रीछ के पीछे नहीं रीछ हमारे
पीछे भाग रहा था गाने के समय! और कट भी नहीं कर सकते थे क्योकि एक ही
शॉट में होना था, हालांकि अंदर से बड़ा डर लग रहा था, बट बाहर से खुशी
दिखानी थी, तो वो बहुत ही रोमांचक था! हमने कई बार ऑडियंस के साथ भी
शूट परफॉर्म किया ‘सर्कस’ में, तो उसमें भी कोई रीटेक की गुंजाइश नहीं होती
थी।

रेणुका जी, आपकी स्टोरी भी आ रही है, उसके बारे में भी कुछ बतायें?
मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकती, पर इतना कह सकती हूं कि मैं बॉर्न क्रिस्टिन का
किरदार निभा रही हूं। मेरा लुक और किरदार बहुत ही अलग है उसमें, आगे की
रेंज है इसमें, तो बड़ा ही सशक्त किरदार है। बड़ा अच्छा लगा बड़े दिनों बाद
फिल्म मिली है, हालांकि जो एड फिल्म मेकर हैं- वो डायरेक्टर हैं। पूरा यूनिट
बहुत अच्छा था, पुलकित सम्राट के साथ काम करके आनंद आया, रिचा भी मेरी
फेवरेट है, ऐज ए पर्सन एंड एक्ट्रेस। वो बहुत मुखर हैं अपने थॉट्स को लेकर।
स्ट्रॉन्ग लड़की हैं, अपने ऑपिनियंस पर अटल रहती है, आई लाइक हर ए लॉट,
नॉट ओनली ऐज ऐन एक्टर बट ऑल्सो ऐज ए ह्नयूमन बिइंग।

‘खिचड़ी’ से फिल्म भी बनी दी, कभी कल्पना की थी कि सीरियल पर फिल्म बन
सकती है?
वैसे खाली आतिश ही कर सकते हैं। उनका दिमाग कई दिशाओं में चलता है,
हिम्मत का काम है वो। सीरियल्स में आधे घंटे का होता है, पर फिल्मों में ढाई
घंटे तक सिचुएशंस और किरदारों को पिरोना पड़ता है। अब ये सीजन भी आ
रहा है, मैं एक किरदार तो हूं, लेकिन एक ऑडियंस भी हूं, और ‘खिचड़ी’ से मेरी
एक्सपेक्टेशंस बहुत हाई है।

ये सब सोशल मीडिया पर महिलाओं के लिये कैम्पेन्स को कितना महत्वपूर्ण
मानती हैं?
इनकी इम्पॉर्टेंस काफी बढ़ गई है, घर के अंदर ही ऐसी सिचुएशंस आ जाती है,
कि कोई हमारे साथ है नहीं, या कई बार ये मानते हैं कि, जो इंसान हमें बिलकुल
नहीं जानता, उनके साथ अगर बात करें तो हमारे लिये थैरेपेटिक भी होता है,
और हमारी बात पहुंचती है, शेयर की जाती है। और बाकी लोगों को भी सीख
मिलती है, या फिर उन्हें ट्रांसलेट भी किया जाता है कि कभी पुलिस एक्शन भी
ले। सोशल मीडिया बड़ा डेमोक्रेटिक स्पेस है, वहां हर किसी को अपनी आवाज
बुलंद करने का मौका मिलता है। ये उन लोगों के लिये भी सतर्कता हो जाती है,
जो महिलाओं का गलत फायदा उठाता है। ये बहुत जरूरी है महिलाओ के लिये
बोलना कि वो अकेली नहीं है, सारी महिलाएं उनके साथ उनकी स्थिति में हैं।
कई बार परिवार से ना मिलकर, बाहर से ज्यादा मदद मिलती है। पर कई बार
महिलाओं का कुछ ओपिनियन होता है, उनको ट्रोल भी किया जाता है, बॉडी
शेमिंग है, नेम कॉलिंग है, विक्टिम शेमिंग है, ऐसे कई सारे इशूज हैं। सोशल चेंज
लाने का बड़ा सशक्त माध्यम है। पेटिशंस भी शुरू की जा सकती है, जिसके जरिये
लॉ बदला जा सकता है। मूवमेंट बनाने के लिये पहले बहुत काम करना पड़ता
था, सोशल मीडिया के जरिये ईजी हो गया है घर बैठे।

आप मराठी रियलिटी शो की जज रह चुकी हैं, हिन्दी से क्यूं दूरी बना रखी है
आपने?
नहीं मुझे कभी पूछा ही नहीं गया। एक्टर्स के प्रोफेशन में अवसर मिलना बहुत
जरूरी है। हालांकि मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे हर दौर में अच्छे काम मिलते रहे हैं,
लेकिन ऐसा मौका हिन्दी में नहीं आया। लेकिन मैंने हिन्दी रियलिटी भी टेस्ट कर
लिया है जब मैं ‘झलक’ का हिस्सा थी, ऐज ए पार्टिसिपेंट। लेकिन मुझे टैलेंट
दर्शाने वाले रियलिटी शोज ज्यादा भाते हैं।

आपने मराठी मूवी ‘रीता’ भी डायरेक्ट की थी, आशुतोष जी को लेकर कभी कोई
फिल्म बनाने की सोची नहीं आपने?
जी हां मेरे पास एक कहानी है, और दिलचस्पी भी। जब पुख्ता हो जाये उनका
स्क्रीनप्ले तो मैं उन्हें बताना चाहती हूं। वो एक ऐसे एक्टर हैं जो ड्रीम है किसी
भी डायरेक्टर के लिये। हालांकि मेरे पति हैं, पर ऐज ऐन एक्टर मुझे उनके लिये

रिस्पेक्ट बहुत ज्यादा है। और मैं कभी उनको डायरेक्ट करना चाहूंगी।
हम उन्हें पॉजिटिव देखेंगे या चेंज पायेंगे?
आप चेंज तो डेफिनेटली पायेंगे, उसमें कई सारे शेड्स होंगे, पॉजिटिव से लेकर
नेगेटिव, बहुत यादगार होगा उनका रोल इसमें कोई शक नहीं है।

आप भी उनके साथ एक्ट करेंगी उसमें?
नहीं मैं कैमरा के पीछे ही रहूंगी।

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