हिंदी साहित्य अपने व्यावसायिक लेखक के इंतेज़ार में

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Rakesh Madhotra

बॉलीवुड के उत्तम प्रोडक्शन हाउस में से एक नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट के सीईओ Rakesh Madhotra ने अपना पहला उपन्यास लिखा है।

हाल ही में जारी की गई पुस्तक, दिल ढूंढता है, मनुष्य के जागरूक और अवचेतन दिमाग पर विशद जानकारी देता है। हर इंसान यात्रा पर है, हम खोजते हैं, प्रयोग करते हैं और नई चीजों का ज्ञान प्राप्त करते हैं, लेकिन फिर भी हम ख़ोये हुए रहते है।

राकेश मदहोत्रा ने कहा,“ये पुस्तक एक ऐसे व्यक्ति की यात्रा है जो विश्व का विश्वास और वास्तविकता की खोज करना चाहता है। यह एक आदमी के ब्रेकअप्स और लोग से मिलनी की यात्रा के बारे में है।”

लेखक राकेश मदहोत्रा ​​को विश्वास है कि उनकी पुस्तक के लिए चुनने के लिए वे युवाओं के बीच रुचि पैदा करने में कामयाब रहेंगे। उन्होंने इस पुस्तक को इस तरीके से लिखा है कि वे उन में जिज्ञासा पैदा कर देंगे और पाठक इसके कवर को देखकर ही किताब ख़रीद लेंगे।

जब युवाओं के हिंदी पुस्तकों को पढ़ने में रुचि की कमी के बारे में पूछा गया तो लेखक ने कहा,”अधिकांश लोगों ने अंग्रेजी की किताबें पढ़ी हैं क्योंकि वे अपनी भाषा में सुधार लाना चाहते है, ना की पुस्तक से कुछ सीखने के लिए। हालांकि, चेतन भगत ने आज के युवाओं में पढ़ने की आदत पैदा कर दी है।”

उनका मानना ​​है कि अधिक पढ़ने से वह अज्ञानता की ओर जाता है, इस बारे में बात करते हुए कहा, “हमारे साहित्यिक विद्वानों ने पाठकों और ना पढ़ने वालों के बीच एक बाधा बनाई है, लोगों को लगता है कि किताब पाठक साहित्यिक या साहित्य समुदाय से है, हालांकि ऐसा नहीं है, किताबें सभी के लिए हैं, इस अवरोध को हटा दिया जाना चाहिए।”

लेखक ने देश में शिक्षा प्रणाली पर भी चुटकी ली, जो मुख्य रूप से स्कूलों में अंग्रेजी भाषा को बढ़ावा देता है और हिंदी पुस्तकों की पढ़ाई की सराहना नहीं करते, और तो और माता-पिता भी इसी में योगदान दे रहे हैं। हालांकि ऑनलाइन पुस्तकों के पास एक व्यापक दर्शक है, जो मस्तिष्क को आराम देता है वही पढ़ने के दौरान किताब को पकड़ना दिमाग को सुकून देता है। यह एक ही समय में प्रकाशकों और लेखकों के लिए हानिकारक भी है।

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